नई दिल्ली, 11 सितंबर।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि तटीय पारिस्थितिकी और सुरक्षा को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। सुरक्षित, टिकाऊ और समावेशी तटीय विकास के लिए स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, जागरूक समुदाय, प्रभावी शासन और मजबूत वैज्ञानिक क्षमता जरूरी है।
उन्होंने तटीय पारिस्थितिकी, सुरक्षा और स्थिरता पर राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि इसमें पृथ्वी विज्ञान, शिक्षा, रक्षा, समुद्री संस्थानों, कानून, उद्योग और तटीय समुदायों से जुड़े विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया है। इससे तटीय चुनौतियों को एकीकृत दृष्टिकोण से समझने में मदद मिलेगी।
डॉ. सिंह ने महासागर विज्ञान को राष्ट्रीय नीति से जोड़ने और वैज्ञानिक ज्ञान का इस्तेमाल तटीय योजना व प्रबंधन में करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तटीय समुदायों की आजीविका, पारंपरिक ज्ञान और भागीदारी सतत विकास के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
उन्होंने कहा कि तटीय ढांचा और बंदरगाह देश की कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र हैं। इनके सतत विकास के लिए समुद्री पर्यावरण की वैज्ञानिक समझ आवश्यक है।
केंद्रीय मंत्री ने ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर’ अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि इस वर्ष यह 12 से 19 सितंबर तक चलेगा। समुद्र तटों की सफाई समेत विभिन्न गतिविधियों में गैर-सरकारी संगठनों और अन्य संस्थाओं की भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसा समग्र तटीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, जिसमें पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक अवसर, वैज्ञानिक क्षमता और सुरक्षा एक-दूसरे को मजबूत करें।















