नई दिल्ली, 11 सितंबर।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तीसरे चरण के दिशा-निर्देशों का अनावरण किया है।
इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के राजस्व मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस नए चरण के तहत वर्ष 2026 से 2031 की अवधि के लिए साढ़े पांच सौ करोड़ से अधिक के बजट से एकीकृत भूमि स्टैक तैयार किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह पहल ग्रामीण नागरिकों और किसानों के लिए जीवन को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उनके अनुसार जमीन केवल एक अचल संपत्ति नहीं बल्कि किसानों का गौरव और पीढ़ियों की विरासत है।
कार्यक्रम में यह जानकारी भी दी गई कि पिछले चरणों में देश भर में नब्बे प्रतिशत से अधिक अधिकार अभिलेखों और भू-नक्शों का डिजिटलीकरण सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
तीसरे चरण के तहत अब प्रत्येक भूखंड को चौदह अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर यानी भू-आधार दिया जाएगा जिससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।
इसके साथ ही देश के चुनिंदा उप-पंजीयक कार्यालयों को आधुनिक सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा जहाँ नागरिकों को बेहतर और डिजिटल सुविधाएं मिल सकेंगी।
योजना के तहत पुराने और ऐतिहासिक भूमि दस्तावेजों का भी डिजिटल संरक्षण किया जाएगा ताकि पुश्तैनी जमीन से जुड़े विवादों को आसानी से सुलझाया जा सके।
राजस्व अदालतों की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए इसे सीधे भूमि रिकॉर्ड से जोड़ने का प्रावधान किया गया है जिससे मुकदमों के निपटारे में तेजी आएगी।
शहरी क्षेत्रों में संपत्ति प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए नक्षा योजना को गति दी जाएगी जिसके तहत शहरी संपत्ति कार्ड भी जारी किए जाएंगे।
इस संपूर्ण महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्र सरकार के शत-प्रतिशत वित्तीय सहयोग से राज्यों में लागू किया जाएगा जिसकी निगरानी उन्नत डिजिटल पट के माध्यम से होगी।














