नई दिल्ली, 11 सितंबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत-रूस के विशेष और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले दोनों नेताओं की दो सप्ताह में यह दूसरी मुलाकात हुई। बातचीत में ऊर्जा, रक्षा और दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों से समुद्री व्यापार तथा भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर पड़ रहे असर पर विचार साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत ने शांति प्रयासों में सहयोग की अपनी तत्परता भी जताई।
भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंध भी बैठक का अहम विषय रहे। रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात की हिस्सेदारी 2026 में बढ़ी और जुलाई में यह 51 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। मध्य पूर्व से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारतीय शोधन संयंत्रों की रूसी तेल पर निर्भरता बढ़ी।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तमिल भाषा के प्रसिद्ध शास्त्रीय ग्रंथ तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भी भेंट किया। दोनों नेताओं ने भारत-रूस औद्योगिक मेले का दौरा किया, जहां प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विमानन, अंतरिक्ष, परमाणु विज्ञान और भारी इंजीनियरिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों की रूसी कंपनियों ने भाग लिया।
दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डालर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखते हैं। वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 70 अरब डालर रहा था।















