मुंबई, 11 सितंबर।
हिंदी सिनेमा की थ्रिलर फिल्मों में रहस्य आम बात है, मगर 'हैवान' की कहानी एकदम अलग है। यह सिर्फ अपराधी को खोजने की कहानी नहीं है। इसमें एक खूंखार और ताकतवर इंसान का सामना एक ऐसे व्यक्ति से होता है, जिसके पास आंखों की रोशनी नहीं है। निर्देशक प्रियदर्शन ने इसी बेमेल टकराव को फिल्म की नींव बनाया है। एक ओर बाहुबल और हिंसा से भरा परशुराम है, तो दूसरी ओर अपनी समझ और धैर्य के बल पर टिका श्याम है।
परशुराम बहुत ही रहस्यमयी और खतरनाक इंसान है, जो किसी को भी आसानी से डरा सकता है। वहीं श्याम एक ऐसी मुसीबत में फंसता है, जहां उसकी आंखों की कमी सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। उसे अपने आसपास के खतरे को भांपने के लिए दिमाग और अन्य इंद्रियों का सहारा लेना पड़ता है। दोनों के बीच का यह संघर्ष लगातार बढ़ता जाता है।
परशुराम श्याम को मानसिक तौर पर तोड़ना चाहता है। दूसरी तरफ श्याम अपनी सूझबूझ से हर चाल को नाकाम करने की कोशिश करता है। फिल्म में सिर्फ खौफ पैदा करने वाले दृश्य ही नहीं हैं, बल्कि भावनाओं का भी ताना-बाना बुना गया है। पहल चौधरी ने नंदिनी के रूप में कहानी को एक मजबूत भावनात्मक आधार दिया है।
अक्षय कुमार और सैफ अली खान का काम इस फिल्म की जान है। परशुराम बने अक्षय अपने चिर-परिचित नायक वाले अंदाज से बिल्कुल जुदा नजर आते हैं। वे अपनी खामोशी और शांत बर्ताव से ही खौफ पैदा करते हैं। बिना आवाज ऊंची किए पर्दे पर उनका यह नया रूप दर्शकों को हैरान कर देता है।
सैफ अली खान ने दृष्टिहीन श्याम के रोल में जान डाल दी है। उन्होंने इस किरदार के जरिए सिर्फ सहानुभूति बटोरने की बजाय उसकी मानसिक दृढ़ता को उजागर किया है। श्याम के भीतर डर है, मगर वह हार नहीं मानता। दोनों अभिनेताओं की यही जुगलबंदी पर्दे पर एक अलग ही रोमांच जगाती है। बोमन ईरानी, सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर, शारिब हाशमी और असरानी ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ पूरा न्याय किया है।
थ्रिलर फिल्मों के मंझे हुए निर्देशक प्रियदर्शन ने एक बार फिर अपनी काबिलियत साबित की है। वे बिना किसी बड़े झटके के सिर्फ अनिश्चितता से ही तनाव पैदा कर देते हैं। फिल्म का माहौल काफी गंभीर है। कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी धीमी जरूर लगती है, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर और प्रीतम का संगीत इसे संभाल लेता है।
कुल मिलाकर 'हैवान' अपने किरदारों के संघर्ष के लिए देखी जानी चाहिए। अक्षय का खूंखार अवतार और सैफ का संयम दर्शकों को सीट से बांधे रखता है। अगर आपको तनाव से भरपूर और बेहतरीन अभिनय वाली फिल्में पसंद हैं, तो इसे बड़े पर्दे पर जरूर देखना चाहिए।














