लखनऊ, 27 जुलाई।
हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति ने उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा और विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद राज्य में लागू विभिन्न शैक्षिक सुधारों, डिजिटल पहल और छात्र कल्याण योजनाओं की सराहना की। समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश का शिक्षा मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी और अनुकरणीय है।
सोमवार को लखनऊ में विधानसभा सभागार में आयोजित बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने समिति के समक्ष प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों, डिजिटल गवर्नेंस, शोध एवं नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्र हित से जुड़ी योजनाओं की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह यादव सहित अन्य सदस्य और अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 24 राज्य विश्वविद्यालय, 56 निजी विश्वविद्यालय, एक डीम्ड विश्वविद्यालय, एक मुक्त विश्वविद्यालय, 216 राजकीय महाविद्यालय, 330 सहायता प्राप्त महाविद्यालय और 7,526 स्ववित्तपोषित महाविद्यालय संचालित हैं। प्रदेश में स्थापित 71 नए राजकीय महाविद्यालयों के लिए 1,349 पद सृजित किए गए हैं, जबकि 46 महाविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2025-26 से प्रवेश और अध्यापन कार्य शुरू हो चुका है।
अधिकारियों ने बताया कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी मंडलों में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय स्थापित किए गए हैं तथा राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (एसएलक्यूएसी) को सक्रिय किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम और रोजगारपरक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
डिजिटल गवर्नेंस के तहत उच्च शिक्षा निदेशालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई है। वहीं, शैक्षणिक सत्र 2024-25 से सभी राज्य और निजी विश्वविद्यालयों में समर्थ पोर्टल लागू किया गया है तथा सत्र 2025-26 से प्रवेश प्रक्रिया भी इसी पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है। शिक्षकों और कर्मचारियों का सेवा विवरण मानव संपदा पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है।
बैठक में बताया गया कि उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों और उनके आश्रितों के लिए मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना लागू की गई है, जिससे लगभग 7.5 लाख लोगों को लाभ मिल रहा है। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत विद्यार्थियों को निःशुल्क स्मार्टफोन और टैबलेट वितरित किए जा रहे हैं। वर्ष 2026-27 में रिसर्च एंड डेवलपमेंट योजना के लिए 500 लाख रुपये तथा राजकीय महाविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए 13.60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
रोजगारपरक शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को प्रतिमाह 1,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। साथ ही मुख्यमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना और मुख्यमंत्री भारतीय ज्ञान प्रणाली वैश्विक उत्कृष्टता कोष जैसी योजनाओं की भी जानकारी समिति को दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि राजकीय महाविद्यालयों में चयनित 840 प्रवक्ताओं की ऑनलाइन पदस्थापना की जा चुकी है, जबकि 1,253 पदों का अधियाचन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजा गया है। सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में भी नियुक्ति प्रक्रिया जारी है।
इसके बाद हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति ने बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ भी बैठक की। बैठक में ऑपरेशन कायाकल्प, मुख्यमंत्री मॉडल एवं अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय, प्रोजेक्ट अलंकार, स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, ड्रीम लैब, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, विद्या समीक्षा केंद्र, निपुण भारत मिशन, शिक्षक प्रशिक्षण और डिजिटल निगरानी प्रणाली सहित विभिन्न पहलों की जानकारी दी गई।
समिति के सदस्यों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल तकनीक के उपयोग, आधारभूत संरचना, कौशल विकास और छात्र-केंद्रित योजनाओं में हुए सुधार अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायी हैं।

















