नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026।
कांग्रेस ने 16 से 18 अप्रैल तक बुलाए गए संसद के विशेष सत्र को एकतरफा करार देते हुए सवाल उठाया है कि यह निर्णय सरकार की एकतरफा मंशा का परिणाम है। पार्टी ने कहा कि इस पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ पत्राचार किया गया था, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि यह केवल औपचारिकता भर थी और सरकार पहले से ही विशेष सत्र बुलाने का मन बना चुकी थी।
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच हुए पत्राचार का विवरण साझा करते हुए कहा कि 16 मार्च को रिजिजू ने खरगे को पत्र लिखकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा की इच्छा जताई। खरगे ने जवाब में सर्वदलीय बैठक बुलाने और लिखित प्रस्ताव देने का सुझाव दिया।
रमेश ने बताया कि 24 मार्च को विपक्षी दलों ने रिजिजू को पत्र भेजकर कहा कि वर्तमान में कई राज्यों में चुनाव और आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू है, इसलिए 29 अप्रैल के बाद बैठक बुलाई जाए। इसके बावजूद 26 मार्च को रिजिजू ने फिर से पत्र लिखकर बैठक की मांग दोहराई और संविधान संशोधन के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की बात कही।
कांग्रेस ने बताया कि 16 से 26 मार्च तक पत्रों का आदान-प्रदान जारी रहा, लेकिन भारतीय जनता पार्टी पहले से तय कर चुकी थी कि विशेष सत्र बुलाया जाएगा। अंततः रिजिजू ने एकतरफा निर्णय लिया और 16, 17 व 18 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाने का आदेश जारी किया। इसके अनुसार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनावों से कुछ दिन पहले यह विशेष सत्र आयोजित होगा।
रमेश ने कहा कि रिजिजू के पत्रों में केवल नारी शक्ति वंदन अधिनियम का जिक्र था, लेकिन अब स्पष्ट हो गया है कि इस विशेष सत्र में परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया और न तो परिसीमन पर कभी चर्चा हुई और न ही जानकारी दी गई।
अंततः इस तीन दिवसीय विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में 30 महीने के भीतर संशोधन और परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन पर चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में मतदान 23 एवं 29 अप्रैल को दो चरणों में और तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में आयोजित होगा।







