नई दिल्ली, 17 मार्च।
भारतीय इतिहास में 18 मार्च का दिन साहित्य और सिनेमा दोनों क्षेत्रों के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी दिन भारत में विश्व पुस्तक मेले की शुरुआत हुई थी, जिसका उद्देश्य देश और दुनिया की श्रेष्ठ पुस्तकों को पाठकों तक पहुंचाना था।
भारत में पहला विश्व पुस्तक मेला 18 मार्च 1972 को राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित किया गया था। इस मेले में 200 से अधिक प्रकाशकों ने भाग लिया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति वी.वी. गिरि ने किया था। यह आयोजन पाठकों को देश-विदेश के साहित्य से जोड़ने और प्रकाशन जगत को एक बड़ा मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था।
पहले आयोजन की सफलता के बाद से यह मेला समय-समय पर आयोजित होता रहा और धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो गया। आज यह भारत के सबसे बड़े साहित्यिक आयोजनों में गिना जाता है, जहां देश-विदेश के लेखक, प्रकाशक और पाठक बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं।
18 मार्च का दिन हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और निर्माता शशि कपूर के जन्मदिन के रूप में भी याद किया जाता है। उनका जन्म 18 मार्च 1938 को कोलकाता में हुआ था। शशि कपूर ने अपने अभिनय से हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई और कई लोकप्रिय फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।

उन्होंने व्यावसायिक फिल्मों के साथ-साथ समानांतर सिनेमा को भी प्रोत्साहित किया। फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया और कई सार्थक फिल्मों का निर्माण किया।
शशि कपूर का रंगमंच से भी गहरा जुड़ाव रहा। उन्होंने पृथ्वी थिएटर को नया स्वरूप और पहचान दिलाई और रंगमंच के कलाकारों के लिए मार्गदर्शन किया। उनके सिनेमा और थिएटर में योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
04 दिसंबर 2017 को उनका निधन हो गया, लेकिन भारतीय सिनेमा और रंगमंच में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।












