रायपुर, 26 मार्च।
पिछले दस वर्षों में सैखोम मीराबाई चानू भारतीय वेटलिफ्टिंग की चमक बन चुकी हैं। उन्होंने इस दौरान टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक, तीन विश्व चैंपियनशिप पदक और तीन कॉमनवेल्थ गेम्स पदक अपने नाम किए। हालांकि, एशियन गेम्स का पदक अभी भी उनके सफर में अधूरा है।
मीराबाई ने पहली बार 19 साल की उम्र में 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था, जहां वह नौवें स्थान पर रहीं। 2018 जकार्ता एशियन गेम्स से उन्हें पीठ की चोट के कारण हटना पड़ा।
2022 हांगझोउ एशियन गेम्स में वह पदक के करीब पहुंचीं, लेकिन कूल्हे की चोट ने उनका सपना अधूरा छोड़ दिया। इस चोट के कारण उन्हें लगभग पांच महीने तक खेल से दूरी बनानी पड़ी।
31 वर्षीय मीराबाई ने चोट से उबरने के बाद शानदार वापसी की और 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया, जहां वह लगातार दूसरा ओलंपिक पदक जीतने में सफल नहीं हो पाईं। अब उनका पूरा ध्यान एशियन गेम्स में पदक हासिल करने पर है।
मीराबाई ने कहा, “एशियन गेम्स मेरे लिए खास महत्व रखता है क्योंकि वहां मेरा अधूरा सपना है। प्रतियोगिता का स्तर बहुत ऊंचा है, इसलिए यह चुनौती और भी बड़ी है।”
उनके लिए एक और चुनौती वेट कैटेगरी में बदलाव है। वह आमतौर पर 49 किलोग्राम वर्ग में खेलती हैं, लेकिन नए नियमों के अनुसार उन्हें 48 और 49 किलोग्राम वर्ग के बीच वजन समायोजित करना होगा।
मीराबाई 23 जुलाई से 2 अगस्त तक ग्लासगो में होने वाले 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में 48 किलोग्राम वर्ग में खेलेंगी। इसके बाद 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक जापान के नागोया में होने वाले एशियन गेम्स में 49 किलोग्राम वर्ग में उतरेंगी।
उन्होंने साई मीडिया से कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए मैं 48 किलोग्राम में रहूंगी, लेकिन एशियन गेम्स में दो महीने बाद 49 किलोग्राम में बदलाव करना होगा।”
मीराबाई ने 2026 सीजन की शुरुआत राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप से की और 48 किलोग्राम वर्ग में तीन नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए।
उन्होंने स्नैच में 89 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 116 किलोग्राम उठाकर कुल 205 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह उनके करियर का अब तक का सर्वोत्तम प्रदर्शन भी है।
मीराबाई ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आयोजन की प्रशंसा की और कहा कि यह दूर-दराज के खिलाड़ियों के लिए बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देना गर्व की बात है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है। खासकर उत्तर-पूर्व और जनजातीय क्षेत्रों में प्रतिभा तो बहुत है, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता।”
मीराबाई ने नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और साई ट्रेनिंग सेंटर की भी तारीफ की।
उन्होंने कहा, “इन केंद्रों में खिलाड़ियों को बेहतरीन प्रशिक्षण, पोषण और सुविधाएं मिलती हैं। यहां कई युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कर रहे हैं। ये केंद्र भारतीय खेलों को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दे रहे हैं।”












