नई दिल्ली, 23 मार्च।
केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कोयला गैसीकरण भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता घटाने और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
रविवार को आयोजित भारत विद्युत शिखर सम्मेलन 2026 में उद्योग जगत, विशेषज्ञ, स्टार्टअप, शोधकर्ता, छात्र और नीति निर्माता मौजूद थे। संबोधन में मंत्री ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को स्थायी और संतुलित ऊर्जा नीति की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विनिर्माण, अवसंरचना, डिजिटल कनेक्टिविटी और नवाचार में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
जी. किशन रेड्डी ने कहा कि भारत के कोयले का अनुमानित भंडार लगभग 400 अरब टन है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े में से एक है। ऊर्जा मिश्रण में कोयले का योगदान 55% और बिजली उत्पादन में 74% है। वर्तमान में देश में कोयले की वार्षिक मांग लगभग एक अरब टन है और 2047 तक इसमें वृद्धि की संभावना है। उन्होंने 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के भारत के लक्ष्य पर भी प्रकाश डाला।
मंत्री ने कोयला गैसीकरण को एक परिवर्तनकारी तकनीक बताया, जो कोयले को सिंथेटिक गैस (हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड के मिश्रण) में बदलती है। यह तकनीक स्वच्छ ईंधन, रसायन, उर्वरक और हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयोगी है। इससे घरेलू संसाधनों का अधिक कुशल और आर्थिक उपयोग संभव होता है। उन्होंने कहा कि भारत अभी कच्चे तेल का 83%, प्राकृतिक गैस का 50% और मेथनॉल एवं उर्वरकों का 90% से अधिक आयात करता है, इसलिए ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है।
रेड्डी ने राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन की शुरुआत का जिक्र किया, जिसका उद्देश्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण करना है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की परियोजनाओं को 8,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है। कई बड़े उपक्रम पहले से सक्रिय हैं और कुल निवेश 64,000 करोड़ रुपये से अधिक है। भूमिगत कोयला गैसीकरण जैसी तकनीकें पर्यावरण पर प्रभाव कम करते हुए दुर्गम भंडारों का उपयोग संभव बनाती हैं।
अंत में केंद्रीय कोयला मंत्री ने उद्योग, शिक्षा, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों से सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का आग्रह किया, जिससे कोयला गैसीकरण के माध्यम से बिजली, तेल, गैस और उर्वरक जैसे कई क्षेत्रों में ऊर्जा और औद्योगिक विकास को बल मिलेगा।












