सरकार व नीतियाँ
31 Mar, 2026

ग्रीन अमोनिया समझौते से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा बढ़ावा : केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन अमोनिया समझौते ऊर्जा सुरक्षा, निवेश और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने में निर्णायक साबित होंगे।

नई दिल्ली, 31 मार्च 2026

केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) के तहत किए गए ग्रीन अमोनिया खरीद और आपूर्ति समझौतों को भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं के समय में और अधिक प्रासंगिक हो जाती है।

सोमवार को अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित कार्यक्रम में प्रह्लाद जोशी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह स्पष्ट किया है कि आर्थिक विकास और जलवायु संरक्षण दोनों को बड़े पैमाने पर और तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत वर्तमान में विश्व के सबसे तेजी से विकसित हो रहे नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में से एक है और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।

जोशी ने उद्योग, भारतीय सौर ऊर्जा निगम और उर्वरक कंपनियों के बीच किए गए 10 वर्षीय समझौतों को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर करार दिया। उन्होंने कहा कि ये दीर्घकालिक समझौते परियोजनाओं को साकार करने में मदद करेंगे, वित्तीय समापन को सुनिश्चित करेंगे और हरित अमोनिया उत्पादन में बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच गहरे संबंध पर जोर देते हुए कहा कि आयात पर निर्भरता कम करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आयातित ‘ग्रे अमोनिया’ को ‘हरित अमोनिया’ से प्रतिस्थापित करने से घरेलू उत्पादन क्षमता मजबूत होगी और आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन आएगा। इस पहल से उर्वरक क्षेत्र में अगले 10 वर्षों में लगभग 2.5 बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा बचत होने की उम्मीद है।

जोशी ने कहा कि भारत के ऊर्जा संक्रमण का अगला चरण उन क्षेत्रों पर केंद्रित होगा, जहां उत्सर्जन कम करना चुनौतीपूर्ण है, जैसे उर्वरक, इस्पात, रिफाइनरी और परिवहन। उन्होंने कहा कि हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पाद इन क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, हरित अमोनिया स्वच्छ फीडस्टॉक के रूप में कार्य करने के साथ-साथ औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देगा।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने इस पहल को देश में मजबूत हरित अमोनिया पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौते भारत में हरित अमोनिया के परिचालन की शुरुआत का प्रतीक हैं और उर्वरक क्षेत्र में टिकाऊ और किफायती समाधानों के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

भारत सरकार ने इस मिशन के लिए 19,744 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इसका उद्देश्य देश को ग्रीन हाइड्रोजन और उससे बनने वाले उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। मिशन का लक्ष्य 2030 तक प्रति वर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है, साथ ही प्रमुख क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन घटाना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और निवेश आकर्षित करना भी शामिल है।

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