नई दिल्ली, 01 अप्रैल।
भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी देखने को मिल रही है और 2026 तक डेटा सेंटर की क्षमता में 30 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। मजबूत मांग और निवेशकों की रुचि इस वृद्धि का मुख्य कारण हैं, जिससे डेटा सेंटर सेक्टर में नए अवसर खुल रहे हैं।
सीबीआरई की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट नई डेटा सेंटर क्षमता जुड़ने का अनुमान है, जो 2025 में जोड़ी गई रिकॉर्ड 440 मेगावाट क्षमता से अधिक है। 2025 के अंत तक भारत में कुल डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट थी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस क्षेत्र ने 2025 में 56.4 अरब डॉलर निवेश प्रतिबद्धताएं हासिल की हैं, जिससे कुल निवेश प्रतिबद्धताएं 126 अरब डॉलर तक पहुंच गई हैं। इस वर्ष लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यह राशि 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।
सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र अब केवल संभावनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन की दिशा में बढ़ रहा है। विदेशी पूंजी की प्रमुख भूमिका विकास को गति देने में बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य निवेश में अग्रणी बने हुए हैं। कम लेटेंसी, 5जी रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण अहमदाबाद, विशाखापट्टनम, पटना और भोपाल जैसे टियर-II शहरों में भी तेजी से गतिविधियां बढ़ रही हैं।
मुंबई भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर केंद्र बना हुआ है, जहां कुल चालू डेटा सेंटरों की 50 प्रतिशत से अधिक क्षमता मौजूद है। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान करते हैं।
एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग से बढ़ती मांग के चलते बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप डेटा सेंटर ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी।
सीबीआरई के अनुसार, कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण जैसी सरकारी नीतियों के कारण निवेश में और तेजी आने की उम्मीद है। इससे भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र के रूप में स्थापित होगा।












