अयोध्या, 02 अप्रैल।
देश के प्रमुख उद्योगपति और अडाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अडाणी ने गुरुवार को अपने परिवार के साथ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर पहुंचकर श्रीरामलला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आरती में भी भाग लिया। मंदिर परिसर में उनका स्वागत ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा किया गया। दर्शन के उपरांत उन्होंने मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी प्राप्त की तथा करीब आधे घंटे तक परिसर में रहे।
अहमदाबाद से दो चार्टर्ड विमानों के जरिए अयोध्या पहुंचे गौतम अडाणी अपने परिवार के साथ सीधे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मंदिर पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी डॉ. प्रीति अडाणी, पुत्र करण अडाणी और बहू परिधि अडाणी भी मौजूद रहे। दर्शन के दौरान मंदिर पुजारियों ने उनका तिलक कर स्वागत किया और उन्होंने प्रसाद भी ग्रहण किया। इस अवसर पर हनुमान जयंती के दिन उन्होंने श्रीराम यंत्र के भी दर्शन किए।
दर्शन के बाद गौतम अडाणी ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के दर्शन करना उनके और उनके परिवार के लिए अत्यंत भावुक और गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, एकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। भगवान राम के आदर्श सत्य, कर्तव्य और सेवा की भावना को प्रेरित करते हैं, जो देश की प्रगति के मार्गदर्शक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, भाषाओं और विचारों से जुड़ाव बढ़ाने वाली पहल के माध्यम से इंडोलॉजी के अध्ययन को आगे बढ़ाने में सहयोग जारी रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक शिक्षा के समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
मंदिर दर्शन के पश्चात गौतम अडाणी श्री निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद किया। उन्होंने गुरुकुल की परंपराओं को समझते हुए इस प्रणाली को संरक्षित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि देश तेजी से आधुनिक तकनीक की ओर बढ़ रहा है, लेकिन पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
इस दौरान उन्होंने गुरुकुल में एआई आधारित प्रयोगशाला स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिससे परंपरा और तकनीक का समन्वय संभव हो सके। अडाणी ने अडाणी फाउंडेशन के माध्यम से इस पहल को सहयोग देने की बात कही। उन्होंने छात्रों के साथ समय बिताया, श्लोक सुने और परिसर में स्थित गौशाला का भी अवलोकन किया।
गौरतलब है कि वर्ष 1935 में स्थापित यह गुरुकुल लगभग 200 विद्यार्थियों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करता है। यहां आवासीय व्यवस्था के साथ पारंपरिक जीवनशैली, गौशाला और वैदिक शिक्षा का समावेश देखने को मिलता है। इस संस्थान का इतिहास भी समृद्ध रहा है, जहां पूर्व में महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान व्यक्तित्व भी आ चुके हैं।












