सिंधानूर, 04 अप्रैल।
रायचूर जिले के सिंधानूर कस्बे में श्री कृष्ण देवराय सैनिक विद्यालय का उद्घाटन भव्य आयोजन और जनभागीदारी के साथ संपन्न हुआ। यह पहल क्षेत्र में मूल्य आधारित तथा रक्षा उन्मुख शिक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधियों, गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षा समिति के सदस्यों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इस उद्घाटन को क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने शिक्षा को चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित करने वाली शक्ति बताते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन और समर्पण के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में उत्तरी कर्नाटक की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया गया। चालुक्य काल की स्थापत्य कला से लेकर विजयनगर साम्राज्य की समृद्धि तक के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए श्री कृष्ण देवराय के योगदान को स्मरण किया गया। उनके नाम पर सैनिक विद्यालय की स्थापना को ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया।
वक्ताओं ने सैनिक विद्यालयों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये संस्थान केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र सेवा के गुणों का विकास भी करते हैं। कर्नाटक की रक्षा क्षेत्र में भूमिका का उल्लेख करते हुए रक्षा उत्पादन और नवाचार में राज्य के योगदान को महत्वपूर्ण बताया गया।
उन्होंने बताया कि देश में सैनिक विद्यालयों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे अधिक युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिल सके। वर्तमान में हजारों कैडेट इन संस्थानों में अध्ययनरत हैं और छात्राओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। राष्ट्रीय कैडेट कोर के विस्तार से युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भागीदारी को और मजबूती मिली है।
भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देश की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। इस विद्यालय की स्थापना से क्षेत्र के युवाओं को नई दिशा मिलेगी और वे देश सेवा के लिए प्रेरित होंगे।











