नई दिल्ली, 02 अप्रैल।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर भारत की तेल विपणन कंपनियों पर साफ दिखाई दे रहा है। घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होने के कारण कंपनियों को प्रति लीटर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
गुरुवार को आयोजित एक अंतर-मंत्रालयी बैठक में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि वर्तमान में तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 104 रुपये प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं पर बढ़ती कीमतों का असर कम करने के लिए सरकार ने उत्पाद शुल्क में कटौती की है, जबकि नुकसान का एक हिस्सा तेल कंपनियां स्वयं वहन कर रही हैं। इस कदम का उद्देश्य आम जनता को राहत देना है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी काफी तेज रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 65 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इसके बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन के खुदरा मूल्य स्थिर रखे गए हैं, जिसके चलते कंपनियों को हर लीटर बिक्री पर घाटा उठाना पड़ रहा है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है।
मंत्रालय के अनुसार देशभर में पेट्रोल पंप सुचारू रूप से कार्य कर रहे हैं और अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित कर ली गई है। भंडारण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, जिससे किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।
सरकार ने यह भी बताया कि घरेलू रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। सल्फर की उपलब्धता को लेकर उठी चिंताओं पर भी स्पष्ट किया गया कि इसमें किसी प्रकार की कमी नहीं है।
प्राकृतिक गैस को लेकर भी मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति जारी रहेगी। साथ ही पाइप्ड नैचुरल गैस के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि एलपीजी पर निर्भरता कम की जा सके।
इसके अतिरिक्त, सरकार ने उन राज्यों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन देने का निर्णय लिया है, जो पाइप्ड गैस नेटवर्क के विस्तार को प्रोत्साहित कर रहे हैं और इसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं।










