भोपाल, 02 अप्रैल।प्रदेश में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को खतरनाक उद्योगों और प्रक्रियाओं में काम पर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। श्रम विभाग ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए बताया है कि श्रम स्टार रेटिंग के तहत बाल श्रम या बंधक श्रम पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी और उसे शून्य अंक दिए जाएंगे।
विभाग ने सभी श्रम अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ऐसे संस्थान जहां बाल श्रमिक या बंधुआ श्रमिक नियोजित नहीं हैं, उन्हें श्रम स्टार रेटिंग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। भले ही अन्य मापदंडों में कुछ कमी हो, फिर भी ऐसे संस्थानों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा।
बाल श्रम के उन्मूलन के लिए ‘वेदा पहल’ के तहत प्रदेश में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस अभियान के अंतर्गत प्रत्येक शुक्रवार को नियमित समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें बच्चों को शिक्षा, पुनर्वास, सुरक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम की प्रगति का आकलन किया जाता है। साथ ही, दर्ज मामलों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर प्राप्त शिकायतों की भी निरंतर निगरानी की जा रही है। कानून के तहत बाल श्रम मामलों में 20 हजार से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और 6 माह से 2 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। वहीं बंधक श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम, 1976 के तहत अधिकतम 3 वर्ष की सजा या 2 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
बंधक श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केंद्र प्रवर्तित योजना 2021 के तहत वयस्क पुरुषों को एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं अनाथ बच्चों और महिला बंधक श्रमिकों को दो लाख रुपये तथा शारीरिक शोषण या मानव तस्करी के पीड़ितों को तीन लाख रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में पुनर्वास के लिए कॉर्पस फंड भी बनाया गया है।










