मोतिहारी, 04 अप्रैल।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए “राष्ट्र प्रथम” की भावना को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से नशे के दुष्प्रभावों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने और स्वस्थ व सशक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महात्मा गांधी का अहिंसा का सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक है और यह न केवल हमारे कार्यों, बल्कि डिजिटल व्यवहार का भी मार्गदर्शन करना चाहिए।
इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल, राज्यसभा के उपसभापति, उप मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, शिक्षा मंत्री, सांसद और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक मौजूद रहे।
उपराष्ट्रपति ने अपने प्रवास के दौरान मोतिहारी स्थित चरखा पार्क और महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक का भी अवलोकन किया। उन्होंने चंपारण सत्याग्रह में गांधीजी के नेतृत्व को नमन करते हुए सत्य, अहिंसा और राष्ट्र सेवा के उनके संदेश को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि चंपारण भारत के इतिहास में विशेष स्थान रखता है, जहां गांधीजी एक जननेता के रूप में उभरे और इस आंदोलन ने पूरे देश की चेतना को जागृत किया।
बिहार की बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यही वह भूमि है जहां गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ, नालंदा विश्वविद्यालय ने विश्व में शिक्षा का परचम लहराया और चाणक्य जैसे महान विचारक उभरे।
उन्होंने विश्वविद्यालय के नामकरण को गांधीजी के आदर्शों—सामाजिक न्याय, ग्रामीण विकास और नैतिक नेतृत्व—से प्रेरित बताया। साथ ही महारानी जानकी कुंवर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका परोपकार शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण रहा है।
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन और नए पाठ्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने फिटनेस, भारतीय ज्ञान प्रणाली और छात्राओं की उत्कृष्ट उपलब्धियों को देश में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।
छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह अंत नहीं, बल्कि आजीवन सीखने की शुरुआत है। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने युवाओं से इनका उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।










