नई दिल्ली, 02 अप्रैल।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने राज्यों के सहयोग से जल जीवन मिशन के अंतर्गत संचालन और रखरखाव नीति का एक ढांचा तैयार किया है। इस पहल का लक्ष्य पाइप जलापूर्ति योजनाओं को दीर्घकाल तक सुचारु रूप से संचालित करना और इसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय समितियों को सौंपना है।
जलशक्ति राज्यमंत्री वी सोम्माना ने लोकसभा में लिखित जवाब के माध्यम से जानकारी दी कि इस नीति के लिए 19 बिंदुओं वाला प्रारूप तैयार किया गया है। इसमें योजना के संचालन को ग्राम पंचायत जल एवं स्वच्छता समितियों को सौंपना, उपभोक्ता शुल्क की व्यवस्था, ऊर्जा खर्च के लिए पर्याप्त वित्तीय प्रावधान और स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर संचालन तथा जल गुणवत्ता की निगरानी में नियुक्त करना शामिल है।
उन्होंने बताया कि अब तक 23 राज्यों ने अपनी-अपनी संचालन एवं रखरखाव नीति को अधिसूचित कर दिया है। आंध्र प्रदेश, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने इसे मंत्रालय द्वारा सुझाए गए बिंदुओं के अनुरूप लागू भी किया है। इन नीतियों के तहत ग्राम पंचायतों और जल समितियों को योजना के निर्माण, क्रियान्वयन, प्रबंधन और रखरखाव का अधिकार प्रदान किया गया है।
नीति के क्रियान्वयन में सहयोग के लिए गैर-सरकारी संगठनों, सामुदायिक संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा गया है। वहीं, स्थानीय स्तर पर संसाधनों के समन्वय के लिए वित्त आयोग अनुदान, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, सांसद और विधायक निधि, जिला खनिज विकास निधि, सीएसआर फंड तथा सामुदायिक योगदान का उपयोग किया जा रहा है।
गांवों में योजनाओं के संचालन और रखरखाव को सुदृढ़ बनाने के लिए ‘नल जल मित्र कार्यक्रम’ प्रारंभ किया गया है। इसके अंतर्गत स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें योजनाओं का संचालनकर्ता बनाया जा रहा है, जिससे वे मरम्मत और रखरखाव के कार्यों को संभाल सकें।
सरकार ने जल जीवन मिशन की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाते हुए इसे जेजेएम 2.0 के रूप में लागू किया है। इसके तहत ‘सुजलाम भारत’ नामक डिजिटल ढांचा विकसित किया गया है, जिसमें प्रत्येक गांव को विशिष्ट पहचान दी जा रही है और जलापूर्ति प्रणाली को स्रोत से नल तक डिजिटल रूप से दर्ज किया जा रहा है।
पारदर्शिता और जन सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए ग्राम पंचायत डैशबोर्ड, ‘जल सेवा अंकलन’ और ‘जल जीवन संवाद’ जैसी पहलें शुरू की गई हैं। इसके अलावा, ग्रामीण जल और स्वच्छता क्षेत्र से जुड़े सभी भागीदारों के लिए ‘रूरल वॉश पार्टनर्स फोरम’ का भी गठन किया गया है।












