नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2026।
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विचार साझा करते हुए कहा कि देश के आदिवासी खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहन देना और उनके लिए कार्यक्रमों जैसे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन करना भारत को एक “वैश्विक खेल महाशक्ति” बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मांडविया ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के महत्व पर जोर देते हुए राष्ट्रपति के विचार को दोहराया कि आदिवासी प्रतिभा को निखारना अंतरराष्ट्रीय खेलों में भारत की अग्रणी स्थिति सुनिश्चित करने का पहला कदम है।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा लिखे एक संदेश को साझा किया, जिसमें उन्होंने खेलों के माध्यम से युवाओं के जीवन में परिवर्तनकारी भूमिका और खेलों के अवसरों के महत्व पर प्रकाश डाला। राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी युवाओं में अपार खेल क्षमता है और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स उन्हें आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करेगा।
राष्ट्रपति ने आगे लिखा कि आदिवासी खिलाड़ियों को निरंतर प्रोत्साहन देने से एक ऐसा प्रतिभा पूल तैयार होगा जो भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगा। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने 1928 में हॉकी में अपना पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता था और आदिवासी खिलाड़ियों ने उस जीत में अहम योगदान दिया। इसके बाद से ही दलीप तिर्की, सुभोध लकरा और सालिमा टेटे जैसे खिलाड़ी भारत की पुरुष और महिला टीमों के लिए अपनी प्रतिभा का योगदान देते रहे हैं।
राष्ट्रपति ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह भी अपने गांव में खेलों और व्यायाम में बेहद रुचि रखती थीं। उन्होंने बताया कि खेल टीम भावना विकसित करते हैं और सामाजिक बंधन मजबूत करते हैं। खेल में जो खिलाड़ी मैदान पर कड़ी प्रतिस्पर्धा दिखाते हैं, उनका व्यक्तिगत जीवन भी मजबूत मित्रता का प्रतीक होता है।
राष्ट्रपति ने खेलो इंडिया पहल की सराहना की और कहा कि इस राष्ट्रीय खेल विकास कार्यक्रम के माध्यम से सभी भौगोलिक क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के लिए उपयुक्त खेल वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘अस्मिता’ योजना भी लागू की जा रही है, जो आदिवासी युवतियों की क्षमता को विकसित कर रही है।
उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि खेलों में युवाओं की प्रतिभा, विशेषकर आदिवासी समुदायों की, हमारे देश के लिए अमूल्य सामाजिक पूंजी है। इसका कुशल उपयोग करके भारत खेलों में कई गौरवपूर्ण कीर्तिमान स्थापित करेगा। राष्ट्रपति ने संदेश दिया, “खेलो इंडिया! खूब खेलो इंडिया!”










