उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा ने आस्था, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
डॉ. शैलेश शुक्ला
उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का जो व्यापक विस्तार पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिला है, वह अब 17 मार्च 2026 तक की स्थिति में एक स्पष्ट, प्रमाणित और निरंतर बढ़ती हुई प्रवृत्ति के रूप में स्थापित हो चुका है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा जारी आँकड़ों के आधार पर विभिन्न विश्वसनीय रिपोर्टों में यह दर्ज किया गया है कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश में 137 करोड़ से अधिक घरेलू पर्यटक आए, जिससे यह राज्य देश में पर्यटन के मामले में प्रथम स्थान पर रहा, जबकि लगभग 3.66 लाख विदेशी पर्यटकों ने भी यहाँ की यात्रा की, जैसा कि पर्यटन मंत्रालय के आधिकारिक आँकड़ों पर आधारित रिपोर्टों में उल्लेखित है। इस विशाल संख्या का बड़ा भाग धार्मिक पर्यटन से संबंधित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश की बढ़ती पर्यटन पहचान मुख्य रूप से आस्था-आधारित यात्रा पर आधारित है।
यदि इस प्रवृत्ति को और गहराई से समझें तो अयोध्या इसका सबसे सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार के आधिकारिक वक्तव्यों के अनुसार वर्ष 2025 में केवल जनवरी से जून के बीच ही लगभग 23 करोड़ श्रद्धालुओं ने अयोध्या का दौरा किया, जो पूर्व वर्षों की तुलना में चार से पाँच गुना अधिक वृद्धि को दर्शाता है। इसी प्रकार यात्रा और पर्यटन क्षेत्र की रिपोर्टों में यह भी दर्ज किया गया है कि वर्ष 2025 की पहली तिमाही, यानी जनवरी से मार्च के बीच ही अयोध्या में 20.36 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुँचे, जो किसी एक धार्मिक शहर के लिए अभूतपूर्व आँकड़ा है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2024 में राम मंदिर के उद्घाटन के बाद जनवरी से सितंबर के बीच 13.55 करोड़ से अधिक घरेलू पर्यटक अयोध्या पहुँचे और इसमें लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जैसा कि प्रतिष्ठित मीडिया रिपोर्टों में वर्णित है। फरवरी 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में यह भी उल्लेख किया गया कि केवल छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने राम मंदिर के दर्शन किए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में कई गुना वृद्धि हुई। ये सभी तथ्य इस बात को प्रमाणित करते हैं कि अयोध्या अब न केवल भारत बल्कि विश्व के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल हो चुकी है।
प्रयागराज का महाकुंभ 2025 इस बढ़ते धार्मिक पर्यटन का एक और अत्यंत महत्वपूर्ण उदाहरण है। विभिन्न आधिकारिक और विश्लेषणात्मक रिपोर्टों में यह दर्ज किया गया है कि इस आयोजन में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन बन गया। यह संख्या केवल आस्था की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की पर्यटन क्षमता, प्रशासनिक प्रबंधन और धार्मिक आकर्षण की व्यापकता को भी दर्शाती है। महाकुंभ के दौरान प्रतिदिन लाखों लोगों की उपस्थिति और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की भागीदारी इस तथ्य को पुष्ट करती है कि धार्मिक पर्यटन अब वैश्विक स्वरूप ग्रहण कर चुका है।
इसी प्रकार ब्रज क्षेत्र, विशेषकर मथुरा-वृंदावन में भी धार्मिक पर्यटन का विस्तार निरंतर बढ़ रहा है। मार्च 2026 में प्रकाशित एक समाचार रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि ब्रज क्षेत्र में आयोजित रंगोत्सव और होली समारोहों में 44 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया, जो इस क्षेत्र की बढ़ती लोकप्रियता और धार्मिक-सांस्कृतिक आकर्षण को स्पष्ट करता है। उसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025 में मथुरा क्षेत्र में लगभग 10.24 करोड़ पर्यटक पहुँचे, जो पिछले तीन वर्षों की तुलना में लगभग 57 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह तथ्य इस बात का संकेत है कि धार्मिक पर्यटन अब केवल मंदिर दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्सव, संस्कृति और अनुभव-आधारित यात्रा का भी रूप ले चुका है।
वाराणसी, जिसे काशी के नाम से भी जाना जाता है, इस पूरे परिदृश्य का एक स्थायी केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के साथ-साथ काशी विश्वनाथ धाम परियोजना के विकास के बाद यहाँ पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विभिन्न सरकारी और शोध रिपोर्टों में यह दर्ज किया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में वाराणसी में आने वाले पर्यटकों की संख्या करोड़ों में पहुँच चुकी है और यह शहर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन गया है।
धार्मिक पर्यटन के इस तीव्र विस्तार के पीछे राज्य सरकार द्वारा किए गए बुनियादी ढाँचे के विकास की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026-27 के बजट में उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया है, जबकि केवल अयोध्या के लिए ही 150 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है, जैसा कि आधिकारिक बजट रिपोर्टों में उल्लेखित है। इसके अतिरिक्त नैमिषारण्य, मथुरा, विंध्याचल और अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी अलग-अलग योजनाएँ बनाई गई हैं। यह निवेश स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को एक दीर्घकालिक आर्थिक और सांस्कृतिक रणनीति के रूप में विकसित कर रही है।
इसके साथ ही पर्यटन से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विभिन्न अध्ययन और रिपोर्टों में यह बताया गया है कि अयोध्या जैसे शहरों में धार्मिक पर्यटन के कारण व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन और रियल एस्टेट क्षेत्र में भारी वृद्धि हुई है। उदाहरण के लिए, फरवरी 2026 की एक अध्ययन रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि राम मंदिर के निर्माण के बाद स्थानीय व्यापारियों की आय कई गुना बढ़ गई और संपत्ति के दामों में 25 से 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट होता है कि धार्मिक पर्यटन केवल सांस्कृतिक गतिविधि नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का भी प्रमुख माध्यम बन चुका है।
हालांकि इस तीव्र वृद्धि के साथ कई चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। बढ़ती भीड़ के कारण यातायात, स्वच्छता और सुरक्षा जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। मार्च 2026 में राज्य सरकार द्वारा आयोजित समीक्षा बैठकों में यह निर्देश दिया गया कि अयोध्या, मिर्जापुर और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की जाए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन भी इस चुनौती को गंभीरता से ले रहा है। इसी प्रकार बड़े आयोजनों और त्योहारों के दौरान विशेष निगरानी और व्यवस्थाओं की आवश्यकता भी लगातार बढ़ रही है।
इसके अतिरिक्त पर्यावरणीय संतुलन और सांस्कृतिक संरक्षण भी एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बनकर उभर रहे हैं। अत्यधिक पर्यटक दबाव के कारण नदी, घाट और ऐतिहासिक स्थलों पर प्रभाव पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए आवश्यक है कि विकास के साथ-साथ संरक्षण की नीतियों को भी समान महत्व दिया जाए। सरकार द्वारा इको-टूरिज्म और सतत पर्यटन के लिए किए जा रहे प्रयास इस दिशा में सकारात्मक संकेत देते हैं।
निष्कर्षतः यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का निरंतर बढ़ना एक गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। अयोध्या, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा जैसे केंद्र न केवल आस्था के प्रतीक हैं, बल्कि वे राज्य की अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहचान के भी प्रमुख आधार बन चुके हैं। उपलब्ध प्रामाणिक आँकड़े और विश्वसनीय रिपोर्टें यह सिद्ध करती हैं कि यह वृद्धि अस्थायी नहीं, बल्कि एक स्थायी प्रवृत्ति है। यदि इस विकास को सुव्यवस्थित योजना, पर्यावरणीय संतुलन और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ाया जाए, तो उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में विश्व का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है।