बीजिंग, 14 जून।
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक की वैश्विक दौड़ में चीन ने एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक को पीछे छोड़ दिया है। चीन ने दुनिया के पहले व्यावसायिक रूप से उपलब्ध ब्रेन चिप को मंजूरी दे दी है। इस सिक्कों के आकार के प्रत्यारोपण को 'NEO' नाम दिया गया है, जो सफल क्लिनिकल परीक्षणों के बाद व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार हो गया है।
चीन की त्सिंगुआ यूनिवर्सिटी और न्यूरेकल टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने इस उपकरण को विकसित किया है। यह डिवाइस अब चीन की सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन में प्रवेश करने की तैयारी में है। इसका प्राथमिक उद्देश्य रीढ़ की हड्डी की चोटों और लकवे से पीड़ित मरीजों को उनके तंत्रिका तंत्र पर नियंत्रण वापस पाने में मदद करना है।
न्यूरालिंक का एन-1 डिवाइस जहां मस्तिष्क के सेरेब्रल कॉर्टेक्स में इलेक्ट्रोड डालने की मांग करता है, वहीं 'NEO' का डिज़ाइन अलग है। इसे खोपड़ी और मस्तिष्क के बीच फिट किया जाता है। ड्यूरा मेटर के पास आठ सेंसर लगाकर यह डिवाइस मस्तिष्क के संकेतों को पकड़ता है और उन्हें डिजिटल कमांड में बदल देता है। अब तक 36 मरीज इस डिवाइस का परीक्षण कर चुके हैं।
एलन मस्क ने न्यूरालिंक की तकनीक को 'जीसस-लेवल टेक्नोलॉजी' बताते हुए इसके महत्व पर जोर दिया है। उनका दावा है कि यह तकनीक टेट्रापलेजिया के मरीजों को नियंत्रण लौटाने और दृष्टि बहाल करने में सक्षम है। फिलहाल न्यूरालिंक अमेरिका में नौ मरीजों पर परीक्षण कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पार्किंसंस, मिर्गी, स्ट्रोक और डिप्रेशन जैसी बीमारियों के इलाज में मददगार साबित हो सकती है। हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि हैकर्स इन उपकरणों के माध्यम से मरीजों के निजी न्यूरल डेटा या यादों तक पहुंच बना सकते हैं, जो भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा हो सकता है।








