एवियन (फ्रांस), 15 जून।
फ्रांस के शहर एवियन में आज से 52वें जी7 शिखर सम्मेलन का आगाज हो रहा है। यह आयोजन एक बेहद सकारात्मक खबर के साथ शुरू हुआ है, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों से जारी युद्ध के समाप्त होने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का समझौता हुआ है। इस मार्ग के खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
यूरोप के प्रमुख देशों ने इस शांति पहल का खुलकर स्वागत किया है। फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और इटली के शीर्ष नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही वैश्विक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
शिखर सम्मेलन को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। एवियन और इसके आसपास के इलाकों को पूरी तरह से किले में तब्दील कर दिया गया है। आयोजन स्थल के चारों ओर रेड और ब्लू जोन बनाए गए हैं, जहां केवल विशेष क्यूआर कोड के माध्यम से ही प्रवेश संभव है।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों आज जी7 देशों के नेताओं का औपचारिक स्वागत करेंगे। इस बार के सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इटली और जापान के नेताओं के साथ ही यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के प्रमुख भी शामिल होंगे। भारत, ब्राजील, दक्षिण कोरिया, केन्या और मिस्र को साझीदार देशों के रूप में आमंत्रित किया गया है।
फ्रांस की अध्यक्षता में हो रहे इस जी7 सम्मेलन में आर्थिक असंतुलन को कम करने, साझा विकास को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही, भू-राजनीतिक संकटों के समाधान और खनिज आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने पर भी चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रपति मैक्रों के निमंत्रण पर एवियन पहुंचेंगे। यह भारत की 13वीं और प्रधानमंत्री की लगातार 7वीं जी7 शिखर सम्मेलन में भागीदारी होगी, जो वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को दर्शाती है।














