कोलकाता, 15 जून।
पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। सोमवार को वे एक बार फिर साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए, जहां उनसे लंबी पूछताछ जारी है।
जांच का मुख्य आधार सीबीआई द्वारा दायर की गई तीसरी अनुपूरक आरोपपत्र है। इसमें साल 2017 की एक 15 मिनट लंबी ऑडियो रिकॉर्डिंग का जिक्र है, जिसमें बार-बार "अभिषेक बनर्जी" नाम लिए जाने का दावा किया गया है। रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर भर्ती के बदले पैसों की वसूली और उनके बंटवारे की चर्चा है।
इस मामले में 'कालीघाट के काकू' सुजयकृष्ण भद्र, शांतनु बनर्जी और कुंतल घोष पहले ही सलाखों के पीछे हैं। एजेंसियों के मुताबिक, सुजयकृष्ण के बेहाला स्थित घर पर हुई एक बैठक में यह साजिश रची गई थी। हालांकि, रिकॉर्डिंग में उल्लेखित 'अभिषेक' की पहचान अभी भी जांच का विषय बनी हुई है।
आरोपपत्र में यह भी सनसनीखेज खुलासा है कि रिश्वत न मिलने पर उम्मीदवारों को डराने-धमकाने और झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश रची गई थी। साथ ही, पूर्व मंत्री पार्थ चट्टोपाध्याय का नाम भी सामने आने से मामले की परतें और गहरी होती जा रही हैं।
एजेंसियां अब अभिषेक बनर्जी की कंपनी 'लिप्स एंड बाउंड्स' और सुजयकृष्ण भद्र के बीच के वित्तीय लेनदेन की भी बारीकी से जांच कर रही हैं। सुजयकृष्ण इस कंपनी में कर्मचारी थे, जिसके चलते यह संबंध ईडी के रडार पर है। अभिषेक बनर्जी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बदले की भावना करार दिया है।














