नई दिल्ली, 15 जून।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में विविधता को सफलता का मूल मंत्र बताया है। उन्होंने एक संस्कृत सुभाषित के माध्यम से इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति की सोच और कार्य करने का ढंग अलग होता है और यही भिन्नता नए विचारों को जन्म देने में अहम भूमिका निभाती है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि जैसे अलग-अलग स्रोतों के पानी का स्वाद भिन्न होता है, वैसे ही हर व्यक्ति की प्रतिभा और दृष्टिकोण भी अनूठा होता है। उन्होंने कहा कि इन विविध प्रतिभाओं का संगम ही देश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।
उन्होंने संस्कृत के सुभाषित “पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः” का उल्लेख करते हुए कहा कि हर व्यक्ति की रचनात्मक दृष्टि अलग होती है। यही विविधता समाज और राष्ट्र निर्माण में नवाचार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति भी इसी विविधता पर टिकी है, जहां अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग अपने अनुभवों से देश को आगे ले जा रहे हैं। विविधतापूर्ण विचारों का यह समावेश ही आधुनिक भारत की प्रगति का आधार है।














