भुवनेश्वर, 17 जून।
ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा में अब एक महीने से भी कम का समय बचा है। ऐसे ऐतिहासिक और संवेदनशील समय में रथ निर्माण स्थल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ सदियों से चले आ रहे एक पारंपरिक नियम को लेकर उपजे विवाद के कारण रथों का निर्माण कार्य पूरी तरह ठप हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रथ बनाने वाले प्रमुख कारीगरों यानी विश्वकर्मा महाराणा सेवायतों ने ‘खेई लकड़ी’ के मालिकाना हक और संग्रह को लेकर प्रशासन के साथ उपजे मतभेदों के बाद काम बंद करने का सामूहिक निर्णय लिया है।
मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पारंपरिक व्यवस्था के मुताबिक, रथ निर्माण की प्रक्रिया के दौरान जो अतिरिक्त गोल लकड़ियां बच जाती हैं (जिनकी लंबाई करीब चार फीट तक होती है) और जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘खेई लकड़ी’ कहा जाता है, उन्हें अपने साथ ले जाने का अधिकार हमेशा से इन विश्वकर्मा महाराणा सेवायतों का होता था। परंतु, इस बार श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों में इस अतिरिक्त लकड़ी को निर्माण स्थल से बाहर ले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।
प्रशासन के इस नए नियम को अपने प्राचीन और पारंपरिक अधिकारों का हनन बताते हुए विश्वकर्मा सेवायतों ने कड़ा विरोध जताया है और रथों का निर्माण कार्य बीच में ही स्थगित कर दिया है। सेवायतों का तर्क है कि यह उनके परंपरागत सेवा अधिकारों में सीधा हस्तक्षेप है, जिसे वे स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार कर पुरानी व्यवस्था को बहाल किया जाए।
गौरतलब है कि रथ यात्रा की घड़ियां बेहद नजदीक हैं, ऐसे में मुख्य निर्माण कार्य रुक जाने से रथों के समय पर तैयार होने और महाप्रभु की रथ यात्रा की तैयारियों पर संकट के बादल मंडराने की आशंका गहरा गई है। हालांकि, इस गंभीर गतिरोध पर अभी तक मंदिर प्रशासन या जिला प्रशासन की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पर्दे के पीछे विवाद को सुलझाने और निर्माण कार्य को जल्द से जल्द दोबारा शुरू कराने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।













