बड़े साहब इन दिनों असमंजस में हैं। उनके आदेशों का पालन पूरी निष्ठा से हो रहा है, लेकिन पालन की रिपोर्ट किसी और दरबार में पेश हो रही है।
वजह सिर्फ इतनी है कि छोटे साहब को बड़े साहब का अंदाज रास नहीं आता। नतीजा यह कि आदेश इधर से निकलते हैं और वाहवाही उधर पहुंच जाती है।














