एक बड़े साहब की हिटलरशाही आखिर उनके अपने स्टाफ पर ही भारी पड़ गई। बरसों से मन मसोसकर काम कर रहे कर्मचारियों का धैर्य टूट गया और उन्होंने काम बंद कर साफ कह दिया कि अधिकार सिर्फ कुर्सी वालों के नहीं होते।
मामला तूल पकड़ता, उससे पहले ही मैडम ने माहौल की नजाकत समझी, भविष्य में अच्छा व्यवहार करने का भरोसा दिया और क्षमा मांगकर आग पर पानी डाल दिया। फिलहाल मामला शांत है, लेकिन अंगार अभी पूरी तरह ठंडे नहीं हुए हैं।














