मणिपुर
17 Jun, 2026

इम्फाल रिम्स के बाहर आधी रात को भारी बवाल: घायल कुकी युवकों के इलाज का विरोध, भीड़ पर पुलिस ने दागे आंसू गैस के गोले

मणिपुर की राजधानी इम्फाल के रिम्स अस्पताल में भर्ती तीन घायल कुकी युवकों को हटाने की मांग को लेकर मंगलवार देर रात भारी विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े।

इम्फाल, 17 जून।

मणिपुर की राजधानी इम्फाल में स्थित प्रतिष्ठित रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) अस्पताल के बाहर मंगलवार देर रात तक भारी विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहा। प्रदर्शनकारी हाल ही में हुई एक मुठभेड़ के दौरान घायल हुए तीन कुकी समुदाय के युवकों को रिम्स अस्पताल से तुरंत किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की मांग कर रहे थे। अस्पताल परिसर के इर्द-गर्द स्थिति बेहद तनावपूर्ण और अनियंत्रित होने के बाद, सुरक्षा बलों को उग्र भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को काबू में लाने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े।

उल्लेखनीय है कि बीते सोमवार को हुई एक गोलीबारी की घटना में तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिन्हें उपचार के लिए इम्फाल के रिम्स अस्पताल में दाखिल कराया गया था। जैसे ही इस बात की भनक स्थानीय लोगों और विभिन्न नागरिक संगठनों को लगी, सोमवार को ही बड़ी संख्या में लोग रिम्स परिसर में जमा हो गए और घायलों का इलाज न करने की मांग को लेकर जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। उस समय भी हालात बिगड़ते देख पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े थे और प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा था। इसके बावजूद, मंगलवार शाम को एक बार फिर प्रदर्शनकारी लामबंद होकर अस्पताल के बाहर जुट गए।

मंगलवार शाम से ही प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा हुजूम रिम्स के निकट मुख्य मार्ग पर डट गया था। उनका सीधा आरोप था कि कांगपोकपी जिले में हाल ही में हुई हिंसक गोलीबारी में घायल हुए तीन कुकी युवकों को इम्फाल के इस प्रमुख अस्पताल में वीआईपी उपचार दिया जा रहा है, जिसका वे पुरजोर विरोध करते हैं। प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की और यह स्पष्ट करने को कहा कि इन घायल मरीजों को कब तक यहाँ से हटाया जाएगा।

अस्पताल प्रबंधन के साथ हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों ने मीडिया को बताया कि रिम्स प्रशासन ने मरीजों को किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर भेजने की कागजी प्रक्रिया शुरू होने और आधी रात (मध्यरात्रि) तक उन्हें शिफ्ट कर दिए जाने का मौखिक भरोसा दिया है। हालांकि, अस्पताल के इस आश्वासन से प्रदर्शनकारी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने रात गहराने के बाद भी अपना आंदोलन और घेराव जारी रखा।

आंदोलनकारियों का कहना है कि हाल ही में लीलोन वैफेई गांव से अगवा किए गए छह नागा नागरिकों की निर्मम हत्या को लेकर बहुसंख्यक समाज और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। उनका आरोप है कि इस जघन्य हत्याकांड में संलिप्त मुख्य आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जबकि चंगुल से मुक्त कराए गए बंधकों ने पुलिस को अपहरणकर्ताओं के बारे में स्पष्ट सुराग और जानकारियां दे दी हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ऐसे अशांत और संवेदनशील माहौल के बीच घाटी (इम्फाल) में लाकर घायल कुकी युवकों का इलाज कराना जनभावनाओं के खिलाफ है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, लीलोन वैफेई और कोंसाखुल गांवों के सीमावर्ती क्षेत्रों के पास सुरक्षा बलों के साथ हुई कथित मुठभेड़ के दौरान ये तीनों कुकी युवक गोली लगने से घायल हुए थे। इसके बाद घाटी के कई सामाजिक और छात्र संगठनों ने इनके रिम्स में भर्ती होने पर कड़ा ऐतराज जताया और आरोप लगाया कि ये तीनों घायल युवक आम नागरिकों पर हुए हिंसक हमलों और गोलीबारी की वारदातों में सीधे तौर पर शामिल थे।

इस बीच, गतिरोध को सुलझाने के लिए प्रदर्शनकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने राज्य के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह से भी उनके आवास पर मुलाकात की और इस संवेदनशील मामले में त्वरित हस्तक्षेप की मांग की। प्रतिनिधियों के दावे के अनुसार, मुख्यमंत्री ने भी जनभावनाओं को देखते हुए मरीजों को जल्द से जल्द अस्पताल से स्थानांतरित करने का भरोसा दिया था। इसके बावजूद, मंगलवार देर रात तक मरीजों के रिम्स में ही मौजूद रहने के कारण प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भड़क उठा और आंदोलन और ज्यादा उग्र हो गया।

दूसरी तरफ, रिम्स अस्पताल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा है कि एक चिकित्सा संस्थान होने के नाते उनका प्राथमिक और नैतिक दायित्व जाति, धर्म या समुदाय का भेद किए बिना हर घायल और बीमार मरीज को आपातकालीन उपचार उपलब्ध कराना है। प्रशासन ने मानवीय आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं को राजनीतिक या सामाजिक गतिरोधों से दूर रखकर निर्बाध बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील चौराहों पर भारी मात्रा में रैपिड एक्शन फोर्स और पुलिस बल तैनात हैं तथा प्रशासन ने सभी पक्षों से संयम और शांति बरतने को कहा है।

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