जिले के कुछ महारथी पूरे लाव-लश्कर के साथ साहब पर दबाव बनाने पहुंचे थे। सोचा था कि आज तो मैदान मार लेंगे, लेकिन साहब ने फाइलों और दस्तावेजों का ऐसा चक्रव्यूह रचा कि नेतागिरी की सारी हवा निकल गई।
अंदर जो तेवर लेकर गए थे, बाहर आते-आते बगलें झांकते नजर आए। चैंबर से निकले तो चेहरों पर वही भाव था, जो बिना तैयारी परीक्षा देने वाले छात्र का होता है।














