इंदौर, 18 जून।
मध्य प्रदेश को आईटी और सेवा क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को इंदौर में निर्माणाधीन आईटी पार्क-3 का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन प्रदेश की नई आर्थिक प्रगति का प्रमुख आधार बनेगा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर को प्रदेश की आईटी राजधानी के रूप में विकसित किया जा रहा है। आईटी पार्क-3, आईटी पार्क-4, आईटी पार्क उज्जैन, इंदौर-पीथमपुर आर्थिक कॉरिडोर और निजी क्षेत्र की परियोजनाएं मिलकर एक मजबूत औद्योगिक एवं तकनीकी वातावरण तैयार करेंगी। इससे निवेश, रोजगार और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकसित किए जा रहे आईटी पार्क भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से मध्य प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और सेवा क्षेत्र के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि निर्माणाधीन आईटी पार्क-3 को लगभग 557 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीन बिल्डिंग के रूप में विकसित किया जा रहा है। 22 मंजिला इस भवन का कुल निर्मित क्षेत्रफल 11.25 लाख वर्गफीट होगा। इसे मध्य भारत के प्रमुख और आधुनिक आईटी पार्कों में शामिल करने की योजना है।
इसी दौरान मुख्यमंत्री ने इंदौर स्थित प्राचीन श्री वीरगढ़ी हनुमान मंदिर परिसर का भी दौरा किया। उन्होंने मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक बावड़ी का निरीक्षण कर उसके संरक्षण और विकास को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन बावड़ियां और जल संरचनाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत तथा पारंपरिक जल प्रबंधन व्यवस्था की महत्वपूर्ण पहचान हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन समय की आवश्यकता है। उन्होंने बावड़ी की वैज्ञानिक पद्धति से सफाई, जीर्णोद्धार और मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
डॉ. यादव ने कहा कि श्रद्धालुओं और आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बावड़ी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। साथ ही प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने तथा क्षेत्र के सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, जिससे धार्मिक पर्यटन और जल संरक्षण दोनों को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकास और जीर्णोद्धार कार्य तय समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं, ताकि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
















