सागर, 18 जून।
सागर जिले की बीना विधानसभा सीट से विधायक निर्मला सप्रे के कथित दलबदल प्रकरण से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई है। गुरुवार को हुई विस्तृत बहस के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। अब सभी की नजरें अदालत के अंतिम निर्णय पर टिकी हैं।
यह मामला वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ था। निर्मला सप्रे कांग्रेस के टिकट पर बीना विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुई थीं। बाद में उनके भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया।
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद भी विधायक पद से इस्तीफा नहीं देने को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उच्च न्यायालय का रुख करते हुए दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी।
याचिका में यह तर्क दिया गया कि दल परिवर्तन करने वाले जनप्रतिनिधि को अपने पद से त्यागपत्र देकर जनता के बीच दोबारा जाना चाहिए। इसी आधार पर विधायक की सदस्यता को शून्य घोषित करने की मांग न्यायालय के समक्ष रखी गई।
यह कानूनी विवाद लंबे समय से विचाराधीन है और पिछले करीब 702 दिनों से न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है। मामले को लेकर प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों में भी लगातार चर्चा होती रही है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत दलीलें प्रस्तुत की गईं। न्यायालय ने सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर पक्षकारों की बात सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखने का निर्णय लिया।
अब आने वाले दिनों में न्यायालय का फैसला यह तय करेगा कि निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता बरकरार रहेगी या उन्हें अयोग्य घोषित किया जाएगा। इस निर्णय का प्रदेश की राजनीति पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
















