भुवनेश्वर, 25 जून।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज 'संविधान हत्या दिवस' के मौके पर 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे स्याह और काला अध्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि यह वह समय था जिसे देश का कोई भी नागरिक कभी नहीं भुला सकता।
सोशल मीडिया के जरिए अपने संदेश में मंत्री ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सत्ता और परिवारवाद के स्वार्थ में उस समय संविधान और लोकतंत्र की मर्यादाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया था।
प्रधान ने कहा कि उस दौरान नागरिक अधिकारों और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए निरंतर प्रयास किए गए थे। उस दौर की तानाशाही मानसिकता ने अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटने की कोशिश की थी।
उन्होंने अंत में कहा कि देश की जनता ने अपनी सजगता और लोकतांत्रिक शक्ति से तानाशाही को करारी शिकस्त दी। मंत्री ने आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले सभी संघर्षशील लोगों के त्याग और साहस को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।














