भोपाल, 25 जून।
मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया की अध्यक्षता में बुधवार को भोपाल स्थित संभागायुक्त कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी निकायों के बीच वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत बंटवारे के लिए व्यावहारिक नीतियां तैयार करना है।
बैठक में आयोग के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राज्य वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है, जिसका दायित्व सरकार और स्थानीय निकायों के मध्य वित्तीय संतुलन बनाना है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर गांवों के विकास और उनकी वित्तीय स्थिति सुधारने का आह्वान किया।
इस उच्च-स्तरीय चर्चा में संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा सहित भोपाल संभाग के सभी जिला कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत सीईओ और सीएमओ उपस्थित रहे। संभागायुक्त ने जिलों में पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया।
बैठक के दौरान वित्तीय आत्मनिर्भरता पर विशेष मंथन हुआ:
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भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने शहरीकरण का सामना कर रही पंचायतों के लिए 'सेल्फ रेवेन्यू जनरेशन' हेतु विशेष नीति की आवश्यकता जताई।
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जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने 'टैक्स सखी' मॉडल की सफलता को साझा करते हुए संपत्तियों की जीआई टैगिंग का सुझाव दिया।
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सीहोर कलेक्टर बालागुरू के ने बिल्डिंग परमिशन और स्थानीय करों को बिजनेस मॉडल के रूप में अपनाने पर जोर दिया।
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विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता और राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश मिश्रा ने पर्यावरण संरक्षण, पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार और आपदा प्रबंधन के लिए विशेष फंड का प्रावधान करने का सुझाव दिया।
आयोग ने सीहोर नगर पालिका द्वारा अपनाई गई पूर्ण ऑनलाइन लेखा-जोखा प्रणाली की सराहना की। बैठक में विकास कार्यों की गुणवत्ता, स्वच्छता, पेयजल और राजस्व वृद्धि जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई, ताकि स्थानीय निकायों को न केवल सुदृढ़, बल्कि पारदर्शी और आत्मनिर्भर बनाया जा सके।












