पेरिस, 26 जून।
संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट ने दुनिया के सामने एक गंभीर संकट उजागर किया है। आज भी 65.5 करोड़ लोग बिजली की बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। साथ ही, करीब दो अरब लोग खाना पकाने के लिए ऐसे ईंधन का उपयोग करने को मजबूर हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो रहा है।
इस ऊर्जा संकट का सबसे बुरा प्रभाव उप-सहारा अफ्रीका पर देखा गया है। वहां 56 करोड़ से अधिक लोग अंधेरे में रहने को विवश हैं और 97 करोड़ लोग साफ-सुथरे ईंधन से दूर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक 'यूनिवर्सल एक्सेस' का लक्ष्य पाने के लिए अभी की गति को तीन गुना बढ़ाना होगा।
अच्छी खबर यह है कि सस्टेनेबल एनर्जी के क्षेत्र में कुछ सकारात्मक बदलाव हुए हैं। विश्व स्तर पर कुल बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी 30 फीसदी से ऊपर गई है। स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह में भी मामूली वृद्धि देखी गई है।
हालांकि, रिपोर्ट ने कड़ी चेतावनी भी दी है। यदि तत्काल बड़े कदम नहीं उठाए गए, तो दुनिया ऊर्जा के अपने तय लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम रहेगी। सबसे गरीब और पिछड़े देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मदद में आई गिरावट चिंताजनक है, जो पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी घटकर 3.7 अरब डॉलर रह गई है।









