तबादलों की प्रक्रिया शुरू होते ही कई साहबों के चेहरे पर नई चमक दिखाई देने लगी थी। कप्तान की कुर्सी से उठकर डीआईजी की कुर्सी तक पहुंचने के सपने भी सजने लगे थे। मगर इंतजार है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा।
कुछ साहब हर सुबह नई सूची आने की उम्मीद में दिन की शुरुआत करते हैं और शाम तक उम्मीद अगले दिन पर टाल देते हैं। फिलहाल कई जिलों में कप्तानी भी चल रही है और प्रमोशन की आस भी बनी हुई है। हालात कुछ ऐसे हैं कि कुर्सी भी अपनी है और नजर दूसरी कुर्सी पर भी टिकी हुई है।









