रांची, 26 जून।
झारखंड उच्च न्यायालय ने जेपीएससी द्वारा आयोजित सातवीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2021) में दिव्यांग अभ्यर्थियों के आरक्षण में हुई अनियमितताओं पर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने आयोग को याचिकाकर्ता सदानंद कुमार की नियुक्ति के लिए 12 सप्ताह के भीतर आवश्यक अनुशंसा करने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने तर्क दिया कि परीक्षा में कुल 252 पदों में से सात पद दिव्यांगों के लिए आरक्षित थे, लेकिन आयोग ने केवल चार को ही साक्षात्कार के लिए बुलाया और उनमें से केवल तीन का चयन किया। शेष चार आरक्षित पदों को अन्य श्रेणी के अभ्यर्थियों से भर दिया गया, जो 'राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसएबिलिटीज एक्ट, 2016' के प्रावधानों का उल्लंघन है। अधिनियम की धारा 33 और 36 के अनुसार, यदि किसी दिव्यांग उप-श्रेणी में योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलते, तो पदों को अन्य दिव्यांग उप-श्रेणियों में इंटरचेंज करना या उन्हें अगले चक्र के लिए कैरी फॉरवर्ड करना अनिवार्य है।
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता सदानंद कुमार ने चयन के लिए आवश्यक न्यूनतम अंक (580) प्राप्त किए थे। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि तकनीकी आधार पर किसी योग्य अभ्यर्थी को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। जेपीएससी ने भी स्वीकार किया कि दिव्यांग वर्ग के चार पद रिक्त रह गए थे। इन तथ्यों को देखते हुए, उच्च न्यायालय ने कानूनी प्रावधानों के तहत सदानंद कुमार की नियुक्ति पर विचार करने और 12 सप्ताह के भीतर अनुशंसा भेजने का आदेश दिया है।









