नई दिल्ली, 27 जून।
दिल्ली उच्च न्यायालय में गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने के बाद आगामी एक जुलाई से सामान्य कामकाज दोबारा शुरू होने जा रहा है। इसी सिलसिले में हाईकोर्ट प्रशासन ने न्यायाधीशों की पीठ के लिए एक नया रोस्टर जारी किया है। इस नए आवंटन में सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की सुनवाई करने वाली पीठ में एक बड़ा फेरबदल किया गया है।
प्रशासन की तरफ से जारी की गई नई कार्य सूची के मुताबिक अब नेताओं और जनप्रतिनिधियों से जुड़े हुए मुकदमों की सुनवाई का जिम्मा जस्टिस मनोज जैन को प्रदान किया गया है। गौरतलब है कि इससे पहले इन तमाम संवेदनशील मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा संभाल रही थीं। उनके इस दायित्व के दौरान दिल्ली शराब घोटाला नीति सहित कई बेहद चर्चित विवादों पर अदालती कार्रवाई आगे बढ़ी थी।
आबकारी नीति से जुड़े इसी विवाद के दौरान दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़ी अर्जियों पर सुनवाई को लेकर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत काफी सुर्खियों में रही थी। उस समय सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने जज पर भेदभाव बरतने का अंदेशा जताते हुए उनसे इस मुकदमे की सुनवाई से खुद को पृथक करने की मांग की थी।
न्यायाधीश ने अरविंद केजरीवाल की तरफ से आए खुद को अलग करने के उस आग्रह को सिरे से खारिज कर दिया था। इस फैसले के विरोध में केजरीवाल ने उनकी अदालत की कार्यवाही का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया था। इस गतिरोध के सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाते हुए यह पूरा मामला अंतिम निर्णय और आगे की कार्रवाई के लिए दूसरी पीठ के हवाले कर दिया गया था।
बदले हुए कार्य विभाजन के अनुसार अब जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को सिविल रिट याचिकाओं से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी पीठ के समक्ष अब दफ्तरों में महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न, सूचना का अधिकार कानून और अन्य संबंधित विषयों की अर्जियों पर सुनवाई होगी। इसके अलावा वे माइनिंग, दिल्ली परिवहन निगम, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और दिल्ली अर्बन आर्ट्स कमीशन से जुड़ी रिट याचिकाओं पर भी विचार करेंगी।
अदालत का यह बदला हुआ प्रशासनिक ढांचा एक जुलाई से पूरी तरह लागू हो जाएगा। इस तारीख से उच्च न्यायालय की सभी अलग-अलग पीठें आवंटित की गई नई जिम्मेदारियों और तय विषयों के अनुसार मुकदमों की नियमित सुनवाई की शुरुआत करेंगी।









