कलपक्कम, 27 जून।
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी वैश्विक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) में दुनिया के पहले विशेष हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र की शुरुआत की गई है।
यह अनूठा संयंत्र परमाणु प्रक्रिया से निकलने वाली गर्मी (न्यूक्लियर प्रोसेस हीट) का उपयोग करता है। इसे संचालित करने के लिए फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर से मिलने वाली ऊर्जा का सहारा लिया जा रहा है।
इस पूरी परियोजना में कॉपर-क्लोरीन (Cu-Cl) थर्मोकेमिकल चक्र तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव अजीत कुमार मोहंती ने हाल ही में इस अत्याधुनिक सुविधा का औपचारिक उद्घाटन किया।
इस मौके पर डॉ. मोहंती ने कहा कि परमाणु ऊर्जा को स्वच्छ तकनीक के साथ जोड़ना टिकाऊ भविष्य के लिए एक बड़ा रणनीतिक कदम है। यह देश की ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन मुक्ति के लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार होगा।
यह संयंत्र पूरी तरह स्वदेशी है, जिसकी तकनीक भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) मुंबई द्वारा विकसित की गई है। इस तकनीक के व्यावहारिक परीक्षण और प्रामाणिकता को परखने के लिए इसे एक प्रदर्शक मॉडल के रूप में स्थापित किया गया है।
इस केंद्र का सफल संचालन BARC और IGCAR के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कड़ी मेहनत का नतीजा है। इसमें डिजाइनिंग, उपकरण निर्माण से लेकर टेस्टिंग तक के सभी चरणों को दोनों संस्थानों ने मिलकर पूरा किया है।









