रायपुर, 05 जुलाई।
छत्तीसगढ़ और देश की कला जगत के लिए आज का दिन अत्यंत दुखद है। प्रख्यात पंडवानी गायिका और भारतीय लोक संस्कृति की अनमोल रत्न तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। रविवार तड़के रायपुर एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे 70 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं।
पंडवानी कला को विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाने वाली तीजन बाई ने अपनी जादुई आवाज और जीवंत अभिनय से महाभारत के प्रसंगों को घर-घर तक पहुंचाया। उनकी प्रस्तुति महज गायन नहीं, बल्कि अभिनय और लोक परंपरा का अनूठा मेल थी।
दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी इस महान कलाकार ने देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारतीय संस्कृति का परचम लहराया। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर विश्व के बड़े राष्ट्राध्यक्षों तक ने उनके गायन को सुना और सराहा।
कला के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया। जापान के फुकुओका पुरस्कार से भी उन्हें सम्मानित किया गया था।
उनके निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रधानमंत्री सहित तमाम दिग्गज हस्तियों और प्रशंसकों ने उन्हें अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। भारतीय कला जगत ने आज अपनी एक ऐसी विभूति खो दी है, जिसकी कमी हमेशा खलेगी।







