नई दिल्ली, 6 अगस्त।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जिन्हें वर्ष 2024 में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद सत्ता से हटना पड़ा था और जो उसके बाद भारत आ गई थीं, करीब दो वर्ष के निर्वासन के बाद बुधवार को सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली हैं। वह दक्षिण एशिया के विदेशी संवाददाताओं के क्लब के एक कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहेंगे।
वर्ष 2024 के आंदोलन के दौरान सरकारी नौकरियों में आरक्षण के विरोध से शुरू हुआ छात्र आंदोलन हिंसक हो गया था। इसी घटनाक्रम के बाद हसीना को देश छोड़ना पड़ा। दूसरी ओर, बांग्लादेश अब भी भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। पिछले वर्ष उन्हें प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश देने के आरोप में अनुपस्थिति में मृत्युदंड सुनाया गया था।
भारत ने उन्हें अपने यहां रहने की अनुमति दी है और प्रत्यर्पण की मांग स्वीकार नहीं की है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित वर्चुअल संबोधन के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं है और यह कार्यक्रम एक निजी मीडिया संगठन की ओर से आयोजित किया जा रहा है।
मंगलवार को बांग्लादेशी अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया को हसीना का भाषण प्रसारित करने से रोक दिया। इस फैसले की आलोचना करते हुए उनके सहयोगी अबू ओबैदा आरिन ने कहा कि असहमति की आवाज को दबाने की कोशिशें देश की सीमाओं के बाहर प्रभावी नहीं हो सकतीं।
हसीना अगस्त 2024 से नई दिल्ली में स्वयं लगाए गए निर्वासन में रह रही हैं। छात्र आंदोलन के बाद उनकी अवामी लीग सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। उनके देश छोड़ने के बाद कार्यवाहक सरकार बनी और इसी वर्ष चुनाव भी कराए गए।
उन पर आरोप है कि उन्होंने सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और गोली चलाने के निर्देश दिए थे। वर्ष 2025 में मानवता के विरुद्ध अपराधों के मामले में उन्हें अनुपस्थिति में मृत्युदंड सुनाया गया, जिसे उन्होंने कानूनी रूप से अमान्य बताया है। कार्रवाई के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी और 20 हजार से अधिक लोग घायल हुए थे।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने इस मामले के अलावा उनके 17 वर्ष के शासनकाल में 1,500 जबरन गुमशुदगी के मामलों को लेकर भी मृत्युदंड की मांग की थी। एक आधिकारिक जांच में कहा गया कि इनमें बड़ी संख्या राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की थी, जिनका संबंध बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी से था।
बांग्लादेश सरकार ने हसीना के प्रस्तावित संबोधन के प्रसारण पर रोक लगा दी है। इससे पहले जनवरी में उनका एक ऑडियो संदेश नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में सुनाया गया था। उस संबोधन में उन्होंने तत्कालीन अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस को हत्यारा फासीवादी बताया था और कहा था कि उनके नेतृत्व में देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं होंगे। यह संदेश ऑनलाइन भी प्रसारित हुआ था, जिसे एक लाख से अधिक लोगों ने सुना था।
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने उस समय भारत में इस संबोधन की अनुमति दिए जाने पर हैरानी जताई थी। मंत्रालय का कहना था कि भारतीय राजधानी से हसीना को इस प्रकार का संबोधन करने देना बांग्लादेश की जनता और सरकार के प्रति असम्मान है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी आरोप लगाया था कि हसीना ने अंतरिम सरकार को हटाने की खुली अपील की और अपने समर्थकों को चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने के लिए हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाया। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष 12 फरवरी को हुए चुनाव में अवामी लीग को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिली थी।
हसीना के भारत में रहने के कारण आंदोलन में जान गंवाने वाले अनेक परिवार अब भी यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या पूर्व प्रधानमंत्री को कभी न्याय के दायरे में लाया जाएगा। ऐसे परिवारों में शाइना बेगम भी शामिल हैं, जिनके 20 वर्षीय बेटे सज्जात हुसैन सोजाल की आंदोलन के दौरान गोली लगने के बाद मौत हो गई थी। उनका कहना है कि जब तक हसीना को वापस लाकर इस देश में फांसी नहीं दी जाएगी, तब तक उन्हें शांति नहीं मिलेगी।
यह संबोधन 5 अगस्त 2024 को उनकी सरकार के पतन के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर होगा। कार्यक्रम का शीर्षक 'शेख हसीना की घर वापसी' रखा गया है और माना जा रहा है कि वह इसमें अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर संकेत दे सकती हैं।
पिछले महीने हसीना ने कहा था कि वह और अवामी लीग के अन्य नेता इसी वर्ष दिसंबर में निर्वासन समाप्त कर बांग्लादेश लौटेंगे और अदालत के समक्ष पेश होंगे। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपनी संभावित गिरफ्तारी, जेल या मौत की आशंका है, लेकिन वह लौटना चाहती हैं क्योंकि उनके लोग उन्हें बुला रहे हैं।
मृत्युदंड के फैसले के बावजूद उनकी संभावित वापसी को कुछ विश्लेषक राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने और अवामी लीग को फिर से सक्रिय करने की कोशिश मान रहे हैं। इस वर्ष हुए चुनाव में पार्टी को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं मिली थी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वापसी की घोषणा का उद्देश्य अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को संगठित करना और पार्टी को नई दिशा देना हो सकता है। उनका कहना है कि यदि पार्टी को भविष्य में कायम रहना है तो नेतृत्व को व्यक्तिगत हितों से आगे बढ़कर संगठन के भविष्य पर ध्यान देना होगा।
कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि हसीना का संबोधन समर्थकों का मनोबल बढ़ाने का प्रयास हो सकता है। हालांकि, नई सरकार उनके लौटने का स्वागत करने की स्थिति में नहीं दिखती। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि बांग्लादेश में अब भी आंदोलन की स्मृतियां ताजा हैं और उनकी वापसी से राजनीतिक अस्थिरता की आशंका बढ़ सकती है।













