मुंबई, 26 सितंबर।
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र पर मंडराते सूखे के गंभीर संकट को देखते हुए एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 तहसीलों में सूखाग्रस्त होने की औपचारिक घोषणा कर दी है। जिन क्षेत्रों में 'ट्रिगर-1' के मानक पूरी तरह से सटीक बैठे हैं, उन्हें इस दायरे में शामिल किया गया है, जिसके चलते अब प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत तालुका सूखे की चपेट में आ चुके हैं। इस आपदा से निपटने के लिए राज्य प्रशासन ने राहत उपायों की एक व्यापक श्रृंखला का एलान किया है, जिसके तहत भू-राजस्व (लैंड रेवेन्यू) में छूट, फसल ऋण का पुनर्गठन (रीस्ट्रक्चर), कृषि लोन की वसूली पर रोक और बिजली से चलने वाले कृषि पंपों के बिलों में विशेष छूट दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि 7.5 हॉर्स पावर क्षमता तक के पंपों का बिजली बिल पहले से ही माफ है, लेकिन अब इससे अधिक क्षमता वाले पंपों को भी इस दायरे में राहत प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, विद्यार्थियों के परीक्षा शुल्क में रियायत देने और रोजगार गारंटी योजना के नियमों को शिथिल कर अधिक से अधिक रोजगारपरक कार्य शुरू करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
संकट की इस घड़ी में ग्रामीण जनता और किसानों को हरसंभव संबल देने के वास्ते प्रभावित इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए टैंकरों की व्यवस्था, किसानों के पंपों के कनेक्शन न काटने, खेती पर आश्रित मजदूरों व किसानों के लिए खाद्यान्न वितरण, तथा पशुधन के वास्ते चारे का पुख्ता इंतजाम किया जा रहा है। जल संरक्षण के कार्यों को युद्ध स्तर पर चलाने के साथ ही पहले से दिए गए निर्देशों के अनुरूप पेयजल और मवेशियों के पानी की सुचारू प्लानिंग जारी रखने को कहा गया है। सभी जिला कलेक्टरों को फसल नुकसान के पंचनामे की प्रक्रिया फौरन पूरी करने के आदेश दिए गए हैं, जिसमें फसलों की वास्तविक स्थिति दर्शाने वाली तस्वीरें और जीपीएस तकनीक के जरिए डेटा संग्रह करना अनिवार्य किया गया है। इससे पहले 24 सितंबर को वाशिम दौरे के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया था कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर सूखा घोषित करने हेतु जल्द ही सरकारी आदेश (जीआर) लाएगी। साथ ही, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया था कि कृषि संकट से जूझ रहे राज्य के उन सभी पात्र किसानों को फसल कर्ज माफी का लाभ दिया जाएगा जो पूर्व की योजनाओं से वंचित रह गए थे। गांवों में किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया था कि सरकारी महकमा ग्रामीण राहत कार्यों को शीर्ष प्राथमिकता देगा और संकट से उबारने के लिए आपातकालीन उपायों के तहत पानी, चारा और पंचनामे की प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता व तेजी बरती जाएगी।














