उज्जैन, 05 अक्टूबर।
श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का विशेष पूजन और श्रृंगार किया गया। सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के साथ गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं की पूजा शुरू हुई। इसके बाद भगवान महाकाल का जल से अभिषेक करने के बाद दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। अनुष्ठान के अगले चरण में चंदन का तिलक लगाकर भांग, चंदन और त्रिपुंड से बाबा का श्रृंगार किया गया तथा आभूषण अर्पित किए गए। इसके बाद भगवान को जटाधारी स्वरूप में राजा श्रृंगार कराया गया। प्रथम घंटाल के बाद मंत्रोच्चार के साथ हरिओम जल समर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई, जिसमें महा निर्वाणी अखाड़े की भी सहभागिता रही।
भस्म आरती के आगे के क्रम में बाबा महाकाल का आकर्षक अलंकरण किया गया। उन्हें चांदी का शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई तथा सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहीं। इस दौरान मंदिर परिसर लगातार बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और इस दिव्य स्वरूप के दर्शन से श्रद्धालुओं को पुण्य लाभ प्राप्त होता है।













