नैनीताल, 06 अक्टूबर।
आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एआरआईईएस) के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने ब्लेजार ओजे 287 की करीब एक दशक तक निगरानी कर इसके प्रकाश और रंग में होने वाले बदलावों का विस्तृत अध्ययन किया है। वर्ष 2015 से 2025 के बीच 18 देशों के 48 शोध संस्थानों और विश्वविद्यालयों के 106 वैज्ञानिकों ने करीब दो दर्जन दूरबीनों की मदद से इसके अवलोकन किए। लगभग चार अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित ओजे 287 में दो महाविशाल ब्लैक होल एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं और उनका कक्षीय चक्र करीब 12 वर्ष का है। यह ब्लेजार लगभग प्रकाश की गति से पृथ्वी की दिशा में प्लाज्मा के शक्तिशाली जेट छोड़ता है, जिसके कारण रेडियो तरंगों से लेकर गामा किरणों तक इसकी चमक में तेज बदलाव देखे जाते हैं। वैज्ञानिकों ने 2015 से 2019 के बीच आए प्रकाशीय उभारों पर विशेष ध्यान दिया और अलग-अलग समय पर दोनों ब्लैक होल की स्थिति, चमक, स्पेक्ट्रम तथा ध्रुवण में बदलावों का अध्ययन किया।
अध्ययन के दौरान 21 अक्टूबर से 22 नवंबर 2017 के बीच कम चमक वाली अवस्था में दर्ज किए गए आठ ऑप्टिकल स्पेक्ट्रम का भी विश्लेषण किया गया। इनके आधार पर केंद्रीय ब्लैक होल का द्रव्यमान सूर्य से कम से कम 3.89 अरब गुना अधिक होने का अनुमान लगाया गया। वैज्ञानिकों ने छोटे ब्लैक होल से संभावित उत्सर्जन के संकेतों और पूरे द्विआधारी तंत्र के व्यवहार का भी अध्ययन किया। दशकभर के आंकड़ों को अन्य तरंगदैर्ध्य पर जमीन और अंतरिक्ष आधारित दूरबीनों से मिले अवलोकनों के साथ जोड़ने से ओजे 287 के उत्सर्जन तंत्र और उससे जुड़ी अत्यधिक ब्रह्मांडीय प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिली है। शोध से मल्टीमैसेंजर खगोल विज्ञान के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं, जिसमें प्रकाश, गुरुत्वाकर्षण तरंगों, न्यूट्रिनो और कॉस्मिक किरणों जैसे विभिन्न संकेतों का एक साथ अध्ययन किया जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, आगे भी लगातार बहु-तरंगदैर्ध्य निगरानी से सापेक्षतावादी जेट, महाविशाल द्विआधारी ब्लैक होल और विद्युतचुंबकीय तथा गुरुत्वाकर्षण तरंग संकेतों के संभावित संबंधों को समझने में मदद मिल सकती है।













