नई दिल्ली, 13 अक्टूबर।
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे स्वच्छता अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। वर्ष 2017 से 2025 के बीच गंगा बेसिन में निर्धारित मानकों का पालन करने वाले उद्योगों की संख्या 39 प्रतिशत से बढ़कर 86 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान जैविक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) का भार 26 टन प्रतिदिन से घटकर महज 7.16 टन प्रतिदिन रह गया है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए छह राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के 113 जिलों में 3,703 औद्योगिक इकाइयों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें से चालू पाई गई 3,154 इकाइयों में से 2,715 इकाइयां सभी नियमों का पूरी तरह से अनुपालन कर रही हैं।
गंगा और उसकी सहायक नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए चीनी, कागज, कपड़ा और चमड़ा जैसे मुख्य प्रदूषणकारी क्षेत्रों के लिए विशेष मानक चार्टर लागू किए गए हैं। इसके चलते चीनी उद्योग में प्रति टन गन्ने पर पानी की खपत 155 लीटर से घटकर 58 लीटर पर आ गई है। वहीं कागज मिलों द्वारा शून्य तरल उत्सर्जन तकनीक अपनाने से प्रतिदिन 928.89 मिलियन लीटर भूजल की बचत हो रही है। इसके अलावा, 40 से अधिक साझा अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों के नियमित निरीक्षण और तकनीकी सुधारों के माध्यम से औद्योगिक कचरे के पुनर्चक्रण तथा जल निकायों की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है।














