रक्षा मंत्री के अनुसार, इस आदेश पर रविवार को हस्ताक्षर किए जाने थे। अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर विचार किए जाने तक यह प्रतिबंध छह महीने तक प्रभावी रहेगा। यह रोक सभी प्रकार के ड्रोन पर लागू नहीं होगी।
प्रतिबंध के दायरे में वे ड्रोन आएंगे, जो फाइबर ऑप्टिक केबल से नियंत्रित होते हैं या जिनमें सिम कार्ड लगा होता है। ऐसे ड्रोन पारंपरिक रेडियो फ्रीक्वेंसी के बजाय वाणिज्यिक मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से संचालित किए जाते हैं।
प्रस्तावित आदेश में सुरक्षा एजेंसियों के कार्यों के लिए छूट का प्रावधान भी है। इसके अलावा, आदेश लागू होने से पहले नागरिक उड्डयन प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त ड्रोन को निर्धारित शर्तों के तहत छूट मिल सकती है। छूट के आवेदनों पर विचार करने के लिए एक विशेष समिति गठित करने की व्यवस्था भी की जाएगी।
रक्षा मंत्री के कार्यालय के अनुसार, यह कदम देश के भीतर और बाहर से मिली खुफिया सूचनाओं तथा बढ़ते सुरक्षा खतरों के मद्देनजर उठाया गया है। इन खतरों में ड्रोन हमले, वरिष्ठ अधिकारियों को निशाना बनाने के प्रयास, अपराधियों और आपराधिक गिरोहों द्वारा ड्रोन का इस्तेमाल, खुफिया जानकारी जुटाना और तस्करी जैसी गतिविधियां शामिल हैं।













