शिमला, 14 अक्टूबर।
विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल की जन्मशताब्दी वर्ष के शुभारंभ पर बुधवार को शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में समारोह आयोजित किया गया। इसमें परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने कहा कि अशोक सिंहल ने हिंदू समाज में अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति गौरव और आत्मविश्वास जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बागड़ा के अनुसार, सिंहल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद में सक्रिय रहते हुए संगठन विस्तार, धर्मांतरण से जुड़े विषयों और सामाजिक समरसता के लिए कार्य किया। उन्होंने वाल्मीकि समाज के बीच जाकर लोगों से संपर्क किया और उनके इतिहास तथा योगदान को समझने के प्रयास किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संघ के हिमाचल प्रांत संघचालक प्रोफेसर वीर सिंह रांगड़ा ने सिंहल को ऋषि परंपरा का प्रतिनिधि और राष्ट्रभक्त बताया। उन्होंने कहा कि 24 वर्ष की उम्र में संघ के प्रचारक बने सिंहल ने 36 वर्ष की आयु में एक ही दिन तीन बार हृदयाघात झेलने के बाद भी अपनी गतिविधियां जारी रखीं।
रांगड़ा ने सिंहल के जीवन से जुड़ा एक प्रसंग बताते हुए कहा कि महाभारत की कथा सुनने के बाद उन्होंने ईश्वर के प्रति भाव को राष्ट्रभाव से जोड़ने की बात कही थी। बाद में उन्होंने उस कथाकार को अपना धर्मगुरु बनाया। रांगड़ा ने सिंहल को असाधारण प्रतिभा का धनी और सामाजिक समरसता का समर्थक बताया।
समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बजरंग लाल बागड़ा ने मुख्य वक्ता और प्रोफेसर वीर सिंह रांगड़ा ने कार्यक्रम अध्यक्ष की भूमिका निभाई।














