लखनऊ, 14 अक्टूबर।
लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (लूटा) और लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके कालीदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर मुलाकात कर शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने 20 सूत्रीय मांगपत्र सौंपते हुए विभिन्न लंबित मुद्दों के समाधान का अनुरोध किया। शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने समस्याओं के निराकरण के लिए सकारात्मक आश्वासन दिया। बैठक में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की सिफारिशों के अनुरूप 65 वर्ष करने, ग्रेच्युटी का लाभ देने और सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने जैसी मांगें प्रमुख रहीं। प्रतिनिधिमंडल ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग पूरी होने पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार भी जताया।
मांगपत्र में समर्थ पोर्टल के जरिए प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए यूजीसी विनियम 2018 के अनुरूप पात्रता लागू करने, मूल्यांकन अवधि में 110 एपीआई की अनिवार्यता से संबंधित प्रावधानों में संशोधन, मानदेय शिक्षकों की पूर्व सेवा को जोड़कर करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत पदोन्नति देने और सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों को अनुदान के दायरे में लाने की मांग भी शामिल है। इसके अलावा, पीएचडी की अनिवार्यता पूरी न करने वाले पात्र शिक्षकों को पे-बैंड चार का लाभ, पदोन्नति पर नियमानुसार एक नॉशनल इंक्रीमेंट, छह कार्यदिवस वाले राज्य विश्वविद्यालयों में आकस्मिक अवकाश की संख्या 14 करने, मेडिकल और पितृत्व अवकाश देने तथा बाल्य देखभाल अवकाश से जुड़ी विसंगतियां दूर करने का अनुरोध किया गया। शिक्षकों ने जीपीएफ और पेंशन की ऑनलाइन स्वीकृति, 30 जून को सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन सुनिश्चित करने, नॉशनल इंक्रीमेंट को पेंशन गणना में शामिल करने, स्थानांतरण में एनओसी की प्रक्रिया समाप्त करने, महाविद्यालय के प्रोफेसरों को अकादमिक समितियों में प्रतिनिधित्व देने, एनपीएस की ग्रांट जारी करने, पासबुक उपलब्ध कराने और निदेशालय में सिटीजन चार्टर लागू करने की मांग भी रखी।














