देहरादून, 14 अक्टूबर।
उत्तराखंड शासन द्वारा गुटखा, पान मसाला और तंबाकू व निकोटिनयुक्त खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण एवं बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लागू करने के बाद अब इसके जमीनी क्रियान्वयन और सख्ती की बड़ी परीक्षा शुरू हो गई है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा 13 अक्टूबर को जारी इस आदेश के तहत प्रशासनिक अमले को सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि पूर्व में वर्ष 2013, 2015 और 2019 में भी ऐसे प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद बाजार में इनकी उपलब्धता पूरी तरह नहीं रुक पाई थी। जीएटीएस-2 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 15 वर्ष से अधिक आयु के 26.5 प्रतिशत वयस्क तंबाकू का सेवन करते हैं, ऐसे में इस बार नियमों की प्रभावशीलता और कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगा।
इस प्रतिबंध को सफल बनाने के लिए केवल खुदरा दुकानों पर छापे मारने तक सीमित न रहकर थोक विक्रेताओं, गोदामों, निर्माण इकाइयों और वितरण केंद्रों पर भी लगातार नजर रखनी होगी। पर्वतीय जिलों के दूरस्थ इलाकों से लेकर मैदानी बाजारों तक प्रभावी समन्वय और नियमित निरीक्षण के जरिए ही इन प्रतिबंधित उत्पादों की आपूर्ति को रोका जा सकता है। इसके अलावा, तंबाकू के सेवन से होने वाले मुंह के कैंसर जैसे गंभीर खतरों के प्रति युवाओं और किशोरों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाना तथा लत से जूझ रहे लोगों को उचित परामर्श देना भी आवश्यक होगा, ताकि एक साल बाद समीक्षा के दौरान इसके सार्थक परिणाम सामने आ सकें।














