लखनऊ, 14 अक्टूबर।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लोकभवन में आयोजित एक भव्य गरिमामय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की प्रेरक आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का आधिकारिक लोकार्पण किया। इस विशेष अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में एक अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि का कार्यकर्ता भी अपनी मेधा और निष्ठा के बल पर राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पदों तक पहुंच सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संगठन में जातिवाद, क्षेत्रवाद या वंशवाद के लिए कोई स्थान नहीं है, बल्कि राष्ट्र सर्वोपरि की भावना ही सबसे ऊपर होती है।
पूर्व राष्ट्रपति की इस आत्मकथा में उनके कार्यकाल के दौरान संवैधानिक शक्तियों के विवेकपूर्ण इस्तेमाल, वैश्विक कोविड संकट, तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर के रूप में उनके महत्वपूर्ण योगदान के साथ-साथ केंद्र-राज्य संबंधों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े कई अनसुने प्रसंगों का विस्तृत समावेश किया गया है। इस गरिमामयी समारोह में पूर्व राष्ट्रपति की धर्मपत्नी सविता कोविंद, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व बृजेश पाठक, वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण और रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा सहित कई गण्यमान्य हस्तियां उपस्थित रहीं।

अपने संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति ने इसे अत्यंत भावनात्मक अवसर करार देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश उनकी वास्तविक कर्मभूमि रही है और यहीं की मिट्टी में वे पले-बढ़े तथा शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए साझा किया कि कानपुर देहात के एक छोटे से गांव में उनका साधारण सा घर था, जहां से मिले भाईचारे, मानवीय संवेदनाओं और बड़ों के सम्मान के संस्कार जीवनभर उनके साथ रहे। वर्ष 2017 में राष्ट्रपति चुने जाने के पलों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि तब उन्होंने सोचा था कि देश के किसी दूरस्थ गांव में आज भी कोई छोटा रामनाथ टपकती छत के नीचे बैठकर बेहतर भविष्य के सपने देख रहा होगा, और आज केंद्र व राज्य सरकारें करोड़ों गरीबों को पक्के मकान देकर गरिमापूर्ण जीवन प्रदान कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए हैं, लेकिन यहां जन्मे किसी व्यक्ति को देश का राष्ट्रपति बनने का गौरव पहली बार प्राप्त हुआ, जिसे वे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि न मानकर प्रदेश के करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं का सम्मान मानते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति के जीवन को अभावों से संघर्ष करते हुए सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की एक अत्यंत प्रेरणादायी यात्रा बताया। उन्होंने कहा कि रामनाथ कोविंद ने कभी अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने का मार्ग बनाया। उनका दृढ़ संकल्प और जीवन यात्रा देश के युवाओं के लिए सदैव प्रेरणा का अटूट स्रोत बनी रहेगी।















