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नेपाल
14 Oct, 2026

नेपाल में केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुट हुए मुख्यमंत्री, अधिकार न देने का लगाया आरोप

नेपाल के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय सरकार पर संविधान प्रदत्त अधिकार और संसाधन न सौंपकर प्रांतीय व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया है।

काठमांडू, 14 अक्टूबर।

नेपाल के प्रांतीय मुख्यमंत्रियों ने देश की केंद्रीय सत्ता की कार्यप्रणाली के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। विराटनगर में कोशी प्रांत सरकार द्वारा आयोजित मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में भाग ले रहे शीर्ष नेताओं ने केंद्र सरकार पर संविधान प्रदत्त अधिकारों को हस्तांतरित न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारों के बंटवारे हेतु आवश्यक कानून नहीं बनाए जा रहे हैं और न ही कार्य संचालन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद प्रांतीय सरकारों की कार्यकुशलता पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर पूरे प्रांतीय ढांचे पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्रियों ने यह बात जोर देकर कही कि केंद्र सरकार द्वारा अधिकारों के हस्तांतरण में बरती जा रही ढिलाई के चलते आम जनता के बीच संघीय व्यवस्था को लेकर निराशा का माहौल पनप रहा है। प्रांतीय प्रमुखों का स्पष्ट मानना है कि केंद्र की केंद्रीकृत मानसिकता ही संघीय ढांचे के सुचारू संचालन में सबसे बड़ी अड़चन बनी हुई है।

कर्णाली, गंडकी, बागमती, मधेश, लुंबिनी और कोशी प्रांत के मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त रूप से इस सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि वे केवल अधिकारों की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियां निभाने को भी तत्पर हैं। हालांकि, राज्यों को कमजोर बनाकर संघीय ढांचे को सफल नहीं बनाया जा सकता। राज्यों के अस्तित्व के बिना संघ की कल्पना असंभव है और देश की समग्र उन्नति के लिए प्रांतीय सरकारों का सशक्त होना अनिवार्य है।

प्रांतीय नेताओं ने निराशा व्यक्त की कि संविधान लागू हुए नौ वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी एकल और साझा अधिकारों का हस्तांतरण राज्यों को नहीं किया गया है। इसी वजह से प्रांतीय सरकारें जनभावनाओं के अनुरूप सेवाएं प्रदान करने में असमर्थ साबित हो रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि पुलिस सेवा जैसा महत्वपूर्ण एकल अधिकार भी राज्यों को नहीं सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर आवश्यक कानून न बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य, सिविल सेवा और वन क्षेत्र से जुड़े राज्यस्तरीय नियमों को लागू करने में भारी व्यवधान आ रहा है।

मुख्यमंत्रियों का यह भी आरोप है कि केंद्रीय उदासीनता के कारण राज्यों को सीमित संसाधनों के बीच केंद्रीय अनुदान पर आश्रित रहना पड़ रहा है। इसके उपरांत भी वित्तीय संघवाद को जमीनी स्तर पर उतारने के प्रति केंद्रीय सरकार की ओर से कोई गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है।

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