लखनऊ, 14 अक्टूबर।
लखनऊ विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में दाखिला लेने वाले 21,268 विद्यार्थियों के आधिकारिक पहचान पत्र भारत सरकार के डिजिलॉकर मंच पर उपलब्ध करा दिए हैं। इस व्यवस्था को लागू करने वाला विश्वविद्यालय देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को कागजी प्रक्रियाओं से राहत देना और शैक्षणिक सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाना है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के विश्वविद्यालयों में तकनीक आधारित, पारदर्शी और कागजरहित व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने अन्य विश्वविद्यालयों से भी इस मॉडल को अपनाने की अपील की।
कुलपति जय प्रकाश सैनी के नेतृत्व में शुरू की गई इस सुविधा में स्नातक, परास्नातक, पीएचडी, डिप्लोमा और शास्त्री पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी शामिल हैं। क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पहचान पत्र प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को डिजिलॉकर में प्रवेश कर अपनी तस्वीर के नीचे दिए गए ‘जनरेट वीकार्ड’ विकल्प का उपयोग करना होगा।
यह पहचान पत्र मोबाइल पर चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगा। इससे प्लास्टिक कार्ड रखने, उसके खोने या दोबारा बनवाने की परेशानी नहीं होगी। क्यूआर कोड से पहचान का सत्यापन किया जा सकेगा। पुस्तकालय, वाचनालय, कंप्यूटर प्रयोगशाला, छात्रावास और खेल परिसर में प्रवेश भी आसान होगा। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह व्यवस्था फर्जी पहचान पत्रों पर रोक लगाने और 21 हजार से अधिक प्लास्टिक कार्डों के उपयोग से बचकर पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेगी।














